मंगलवार, 14 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
स्वास्थ्य

हार्ट फेलियर: क्या एक ही दवा हर तरह के मरीज के लिए कारगर है? नई स्टडी ने उठाए सवाल

हार्ट फेलियर के इलाज में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहीं कुछ दवाएं हर मरीज के लिए फायदेमंद साबित नहीं होतीं, बल्कि कुछ मामलों में वे नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। अमेरिका में हुई एक नई स्टडी में यह बात सामन

हार्ट फेलियर: क्या एक ही दवा हर तरह के मरीज के लिए कारगर है? नई स्टडी ने उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

हार्ट फेलियर के इलाज में लंबे समय से इस्तेमाल हो रहीं कुछ दवाएं हर मरीज के लिए फायदेमंद साबित नहीं होतीं, बल्कि कुछ मामलों में वे नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। अमेरिका में हुई एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है कि बीटा-ब्लॉकर दवाएं, जो कमजोर दिल वाले मरीजों के लिए जीवनरक्षक मानी जाती हैं, हार्ट फेलियर के एक दूसरे प्रकार के मरीजों में अस्पताल में भर्ती होने का खतरा बढ़ा सकती हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अध्ययन इस गंभीर बीमारी के इलाज को लेकर व्यक्तिगत जरूरतों को समझने की अहमियत पर जोर देता है।

विज्ञापन

हार्ट फेलियर एक ऐसी स्थिति है जिसमें दिल शरीर की जरूरतों के मुताबिक पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता, जिससे सांस फूलने, थकान और सूजन जैसी समस्याएं होती हैं। दुनिया भर में लाखों लोग इससे प्रभावित हैं।

दो तरह का हार्ट फेलियर

विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट फेलियर मुख्य रूप से दो तरह का होता है। पहले प्रकार में दिल की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिससे उसकी पंप करने की क्षमता घट जाती है। इसे 'हार्ट फेलियर विद रिड्यूस्ड इजेक्शन फ्रैक्शन' (HFrEF) कहते हैं। दूसरे प्रकार में, जिसे 'हार्ट फेलियर विद प्रिजर्व्ड इजेक्शन फ्रैक्शन' (HFpEF) कहा जाता है, दिल की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं। इस वजह से वे ठीक से फैल नहीं पातीं और धड़कनों के बीच दिल में पर्याप्त खून नहीं भर पाता। लगभग आधे मरीज इसी दूसरे प्रकार के हार्ट फेलियर से पीड़ित होते हैं।

स्टडी के चौंकाने वाले नतीजे

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वर्मोंट के शोधकर्ताओं ने डॉ. टिमोथी प्लांटे के नेतृत्व में एक अध्ययन किया, जो 'जेएएमए नेटवर्क ओपन' में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने 'टॉपकैट' नामक एक बड़े क्लिनिकल ट्रायल के आंकड़ों का विश्लेषण किया। उन्होंने पाया कि HFpEF (सख्त दिल वाले) मरीज जो बीटा-ब्लॉकर दवाएं ले रहे थे, उनमें हार्ट फेलियर बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 74 प्रतिशत तक अधिक था।

शोधकर्ताओं का मानना है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि बीटा-ब्लॉकर दिल की धड़कन को धीमा करते हैं, जिससे सख्त मांसपेशियों वाले दिल के अंदर दबाव बढ़ सकता है और सांस फूलने जैसी समस्याएं गंभीर हो सकती हैं।

डॉक्टर की सलाह जरूरी

इस अध्ययन का यह मतलब नहीं है कि मरीज खुद से दवा लेना बंद कर दें। विशेषज्ञों ने साफ किया है कि कई लोग इन दवाओं का इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित धड़कन या हार्ट अटैक के बाद बचाव के लिए भी करते हैं। दवा में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है। यह स्टडी HFpEF के मरीजों के लिए बेहतर और नए इलाज खोजने की जरूरत को रेखांकित करती है।

इनपुट: IANS

N

News4Social वायर डेस्क

News4Social का वायर डेस्क समाचार एजेंसियों (IANS आदि) की लाइसेंस-प्राप्त फीड से ताज़ा व प्रामाणिक राष्ट्रीय, राज्य और विषय-आधारित खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर का स्रोत स्पष्ट रूप से श्रेय (credit) के साथ दिया जाता है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →