रविवार, 16 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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हंगरी में भीषण सूखा: डेन्यूब नदी सूखी, 'भुखमरी की चट्टान' दिखी, परमाणु संयंत्र पर संकट

यूरोप में दशकों के सबसे भयंकर सूखे और गर्मी के कारण हंगरी की डेन्यूब नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है, जिससे देश के एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बचाने के लिए आपातकालीन उपाय किए जा रहे…

हंगरी में भीषण सूखा: डेन्यूब नदी सूखी, 'भुखमरी की चट्टान' दिखी, परमाणु संयंत्र पर संकट
(फोटो: IANS)

यूरोप में दशकों के सबसे भयंकर सूखे और गर्मी के कारण हंगरी की डेन्यूब नदी का जलस्तर रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है, जिससे देश के एकमात्र परमाणु ऊर्जा संयंत्र को बचाने के लिए आपातकालीन उपाय किए जा रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सूखे की गंभीरता इतनी अधिक है कि बुडापेस्ट में नदी के भीतर सदियों से डूबी रही 'रॉक ऑफ स्टार्वेशन' यानी 'भुखमरी की चट्टान' अब लगभग पूरी तरह से दिखने लगी है।

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यह संयंत्र अपने रिएक्टरों को ठंडा रखने के लिए डेन्यूब के पानी पर ही निर्भर है। जलस्तर में भारी गिरावट के चलते पक्स परमाणु संयंत्र को पहले ही अपने बिजली उत्पादन में कटौती करनी पड़ी थी। अब संयंत्र के कूलिंग सिस्टम तक पानी की आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

परमाणु संयंत्र को बचाने के प्रयास

इस संकट से निपटने के लिए हंगरी सरकार संयंत्र के पास नदी के तल पर एक बांध जैसी संरचना (अंडरवाटर वियर) का निर्माण कर रही है। प्रधानमंत्री पीटर मैज्यार ने शनिवार को एक फेसबुक पोस्ट में बताया कि निर्माण कार्य तय कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है और अकेले शनिवार को ही लगभग 5,000 टन पत्थर पक्स पहुंचाया गया।

स्थानीय मीडिया आउटलेट 'डेली हंगरी न्यूज' के अनुसार, मैज्यार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नदी में दो 80 मीटर लंबी बजरी की स्थिति जैसे अस्थायी उपायों से संयंत्र के आसपास पानी का स्तर फिलहाल बढ़ा है। सरकार की योजना कुल 1.45 लाख घन मीटर चट्टानों का उपयोग करके वियर बनाने की है, जिससे संयंत्र के पास पानी का स्तर लगभग एक मीटर तक बढ़ने की उम्मीद है।

व्यापक संकट का संकेत

यह जल संकट सिर्फ हंगरी तक ही सीमित नहीं है। डेन्यूब नदी के घटते जलस्तर का असर पड़ोसी देशों पर भी पड़ रहा है। रोमानिया में भी चेर्नावोडा परमाणु संयंत्र को इसी कारण से अपने दोनों रिएक्टर बंद करने पड़े हैं। हंगरी में सूखे का असर खेती, पेयजल आपूर्ति और ऊर्जा उत्पादन समेत कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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