सवाल-36; जालसाज़ कैसे निकाल लेतें हैं बैंक से पैसे, इनसे कैसे बचें?

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डिजिटलकरण के बढ़ते इस दौर में अपना डाटा सुरक्षित रख पाना भी काफी मुश्किल हो जाता है। यूजर का सबसे बड़ा डाटा उसका बैंकिंग का डाटा होता है। आजकल हैकर्स इन डाटा में सेंध लगाकर यूजर को काफी चूना लगा रहें हैं। इसीलिए यह जरूरी हो जाता है सभी लोग बैंक द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। समय समय पर बैंक सुरक्षा से सम्बंधित एडवाइजरी जारी करती रहती हैं, लेकिन जालसाज फिर भी इसमें सेंध लगा लेते हैं। सुरक्षा के लिहाज से आइये जानते हैं कि किस तरह से जालसाजी होती है और इससे कैसे बचा जा सके।

अक्सर बहुत से बैंक खातों से पैसे निकलने की अनेक धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आती रहती हैं।जिनके कई तरीके भी हो सकते हैं। तो आइये जानते हैं कि किस तरह से जालसाज फ्रॉड करते हैं।

फोन करके जानकारी माँगना:

कई बार ऐसा देखा गया है कि लोगों के पास कॉल आता है और सामने वाला शख्स खुद को उनके बैंक का कर्मचारी बताता है। ऐसे में कई लोग उस पर भरोसा कर लेते हैं और यहीं से फ्रॉड की शुरुआत होती है। ध्यान रहें अगर आप फ्रॉड से बचना चाहते हैं तो ये जान लें कि बैंक कभी फोन करके आपसे निजी जानकारी नहीं मांगते हैं।

डेबिट कार्ड की जानकारी माँगना:

फोन करने वाला शख्स डराने के बाद धोखाधड़ी करने वाला शख्स कस्टमर आईडी और डेबिट व क्रेडिट कार्ड की जानकारी मांग सकता है,लेकिन उसे किसी प्रकार की कोई जानकारी नहीं देनी चाहिए,ऐसा होने पर ठगी का शिकार लोग आसानी से हो जाते हैं।

आपको फोन करने वाला शख्स कई बार आपका नाम, जन्म तारीख और मोबाइल नंबर के बारे में बताता है। ऐसे में आपको लगता है कि फोन करने वाला शख्स बैंक से ही बोल रहा है और आप उस पर भरोसा कर लेते हैं।आपको ऐसे फोन कॉल्स पर भरोसा नहीं करना है।

कार्ड अपग्रेड कराने का ऑफर:

कई मामलों में ऐसा भी हुआ है कि फोन करने वाले शख्स ने क्रेडिट और डेबिट कार्ड को अपग्रेड करने को कहा है। कई बार ये ठग कार्ड को अपग्रेड करने के नाम पर कई ऑफर्स भी देते हैं।

ठगी हो जाने पर क्या करें:

अगर आपके साथ ठगी हुई तो आपका पहला काम यह है कि कस्टमर केयर पर फोन करके अपने कार्ड को ब्लॉक कराएं। इसके बाद अपने बैंक के नजदीकी ब्रांच में जाकर ठगी की सूचना दें। ऐसे में बैंक आपकी जानकारी के आधार पर कार्रवाई करेगा और आपके पैसे भी वापस मिल सकते हैं।

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यदि आपके पास बैंक के नाम से किसी प्रकार का कोई ई-मेल आता है या मैसेज आता है तो उस पर क्लिक ना करें और ना ही मैसेज या मेल के साथ दिए गए लिंक पर क्लिक करें। दरअसल फिशिंग वाले ई-मेल बैंक के असली ई-मेल की तरह ही होते हैं और उनकी पहचान साथ में आए लिंक से होती है।

इन लिंक पर क्लिक करने पर एक नकली वेबसाइट खुलती है जिस पर आपके बैंक से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है और आपको लगता है कि आप असली वेबसाइट पर ही अपनी जानकारी दे रहे हैं और यहीं आपके साथ धोखाधड़ी होती है।

इस फिशिंग अटैक से बचने के लिए आपके लिए यही बेहतर है कि आप बैंक के नाम से आए किसी भी ई-मेल या मैसेज को ओपन ना करें, क्योंकि कोई भी बैंक फालतू के मेल और मैसेज नहीं करता है। मैसेज और मेल तभी आते हैं जब आपके खाते से कोई ट्रांजेक्शन होता है।

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सबसे बड़ी बात अगर आपके पास कुछ भी बैंक से सम्बंधित कोई शिकायत हो या कोई सलाह हो तो आप उसे सोशल मीडिया जैसे ट्विटर या फेसबुक पर उन्हें टैग करके पूँछ सकते हैं। लगभग हर किसी बैंक का यहाँ अपना सोशल मीडिया अकाउंट होता है जो उपभोक्ताओं से सम्बंधित समस्याओं को हल करता है। इस तरह से आप अपने साथ और कई लोगों को भी फ्रॉड से बचा सकते हैं।

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