शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य से 80% कम, ईरानी सैन्य गतिविधियां बड़ी वजह

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही अब भी सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। समाचार एजेंसी IANS ने ब्रिटेन की एक रिपोर्ट के हवाले से…

होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सामान्य से 80% कम, ईरानी सैन्य गतिविधियां बड़ी वजह
(फोटो: IANS)

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही अब भी सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। समाचार एजेंसी IANS ने ब्रिटेन की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि इस रास्ते से होने वाला कुल ट्रैफिक युद्ध-पूर्व के औसत का महज़ 20 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण ईरानी सैन्य गतिविधियां और समुद्री सुरक्षा से जुड़े गंभीर जोखिम हैं।

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यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में 103 जहाज होरमुज़ जलडमरूमध्य में दाखिल हुए, जबकि 89 जहाज बाहर निकले। ये संख्या इस बात का संकेत है कि वाणिज्यिक गतिविधियां सामान्य होने से अभी बहुत दूर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दैनिक आवाजाही अभी भी सिंगल डिजिट में ही सीमित है।

ईरानी गतिविधियां और सुरक्षा जोखिम

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की गतिविधियों को जहाजों के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। इनमें ड्रोन से निगरानी, रेडियो के जरिए जहाजों से संपर्क करना और उन इलाकों में आवाजाही शामिल है, जहां समुद्री बारूदी सुरंगों का खतरा बताया गया है। पिछले कुछ महीनों में कई जहाजों पर हमले भी हुए हैं।

UKMTO के अनुसार, इस जलडमरूमध्य का दक्षिणी ओमानी मार्ग विशेष रूप से जोखिम भरा है। 6 जुलाई से अब तक दर्ज किए गए 18 प्रोजेक्टाइल हमलों में से 16 इसी क्षेत्र में हुए हैं। इन्हीं सुरक्षा चिंताओं के कारण जहाज संचालक इस मार्ग का उपयोग करने में अत्यधिक सावधानी बरत रहे हैं।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर

होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और गैस व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है। यहां सीमित वाणिज्यिक गतिविधि में भी सबसे बड़ी हिस्सेदारी (45%) तेल और अन्य तरल ईंधन ले जाने वाले टैंकरों की है, जो वैश्विक ऊर्जा नेटवर्क में इसके महत्व को दिखाता है। इस मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान बने रहने से ऊर्जा बाजारों, तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर दबाव पड़ सकता है।

इनपुट: IANS

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