होर्मुज संकट में भारत ने कैसे बचाई ईंधन की निर्बाध आपूर्ति — पूर्व राजनयिक सूरी ने खोले राज़
जब होर्मुज जलसंधि के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हाहाकार मचा और कई देशों में पेट्रोल-डीजल की लंबी कतारें लगीं, तब भारत में पंप लगभग सामान्य रूप से चलते रहे। आखिर ऐसा क्यों और कैसे संभव हो पाय
जब होर्मुज जलसंधि के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में हाहाकार मचा और कई देशों में पेट्रोल-डीजल की लंबी कतारें लगीं, तब भारत में पंप लगभग सामान्य रूप से चलते रहे। आखिर ऐसा क्यों और कैसे संभव हो पाया? इस सवाल का जवाब पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने विस्तार से दिया है।
नियंत्रित मूल्य प्रणाली बनी ढाल
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, अमृतसर में बात करते हुए सूरी ने भारत सरकार की रणनीति की सराहना की। उन्होंने कहा, "अलग-अलग देशों में ईंधन की कीमत तय करने के अलग-अलग तरीके होते हैं। कुछ देशों में कीमतें सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ी होती हैं, जबकि भारत एक नियंत्रित मूल्य प्रणाली अपनाता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद जैसे ही कच्चे तेल के दाम उछले, सरकार ने बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद अपने ऊपर ले लिया। तेल कंपनियों ने भी अपने मुनाफे में कटौती की और करों में राहत देकर पेट्रोल-डीजल की कीमतें आम आदमी की पहुँच में बनाए रखी गईं।
इस पूरे दौर में कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुँची — यानी लगभग दोगुनी। फिर भी सरकार ने अधिकांश अतिरिक्त बोझ नागरिकों तक नहीं पहुँचने दिया। यही कारण रहा कि भारत में वे आपातकालीन ईंधन प्रतिबंध नहीं लगाने पड़े जो दुनिया के कई देशों में लागू करने पड़े।
90% आयात-निर्भरता के बावजूद पहले से की तैयारी
होर्मुज जलसंधि के बंद होने को वैश्विक ऊर्जा बाज़ार के लिए सबसे बुरे परिदृश्यों में से एक बताते हुए सूरी ने कहा, "भारत अपनी करीब 90 प्रतिशत जीवाश्म ईंधन जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है और इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। इसके बावजूद सरकार ने समय रहते तैयारी कर ली थी।"
उन्होंने इसके पीछे सरकार की सक्रिय ऊर्जा कूटनीति को अहम कारक बताया। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी स्वयं एक अनुभवी राजनयिक रहे हैं — सूरी के अनुसार यह पृष्ठभूमि संकट-प्रबंधन में बड़े काम आई। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और कतर के साथ भारत के मज़बूत द्विपक्षीय संबंधों ने भी आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करने में भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री की यूएई यात्रा और युद्ध के दौरान पेट्रोलियम मंत्री की कतर यात्रा ने इन रिश्तों को और प्रगाढ़ करने का संदेश दिया।
नए स्रोतों की तलाश और घरेलू माँग का प्रबंधन
सूरी ने बताया कि भारत ने केवल खाड़ी देशों पर निर्भर रहने के बजाय यूएई, अमेरिका और अफ्रीका व लैटिन अमेरिका के नए बाज़ारों से भी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की। घरेलू मोर्चे पर भी माँग को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया गया।
पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए उन्होंने भारत की स्थिति को बेहतर बताया — पाकिस्तान में स्कूल बंद करने पड़े, चार दिन का कार्य सप्ताह लागू हुआ और गंभीर ईंधन संकट उत्पन्न हुआ। इसके विपरीत, अमृतसर में सूरी को केवल एक दिन अफवाहों के चलते पेट्रोल पंपों पर भीड़ दिखी। एलपीजी की कमी भी मात्र दो-तीन दिन रही, उसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।
एलपीजी रीफिल पर 25 दिन का अंतराल — अधिकांश परिवारों के लिए पर्याप्त
सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी सिलेंडर की रीफिल पर 25 दिन का अंतराल तय किया, जिसे सूरी ने अधिकांश परिवारों के लिए पर्याप्त बताया। कुल मिलाकर उनका मानना है कि इस चुनौतीपूर्ण दौर में भारत की पूरी ऊर्जा व्यवस्था ने समझदारी, दूरदर्शिता और कूटनीतिक सक्रियता के बल पर काफी प्रभावी प्रदर्शन किया।
इनपुट: IANS



