मैसूर दशहरा: 417वीं ऐतिहासिक जंबू सवारी की भव्य शुरुआत, देवी चामुंडेश्वरी की शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु
कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूर में बुधवार को 417वीं ऐतिहासिक 'जंबू सवारी' शोभायात्रा का आगाज़ हो गया। यह भव्य जुलूस विजयादशमी के दिन निकाले जाने वाले 10-दिवसीय मैसूर दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण…
कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूर में बुधवार को 417वीं ऐतिहासिक 'जंबू सवारी' शोभायात्रा का आगाज़ हो गया। यह भव्य जुलूस विजयादशमी के दिन निकाले जाने वाले 10-दिवसीय मैसूर दशहरा उत्सव का मुख्य आकर्षण और समापन कार्यक्रम होता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने शुभ 'मीन लग्न' के दौरान मैसूर पैलेस में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर इस परंपरा का शुभारंभ किया।
इस वर्ष देवी की प्रतिमा को 750 किलोग्राम वजनी स्वर्ण हौदे पर विराजमान किया गया, जिसे 'कैप्टन प्रशांत' नामक हाथी ने अपनी पीठ पर धारण किया। यह पहली बार था जब 16 बार इस जुलूस में हिस्सा ले चुके प्रशांत ने मुख्य प्रतिमा वाले हौदे का नेतृत्व किया। उसके साथ 'रूपा' और 'कावेरी' नामक दो सहायक 'कुम्की' हाथी भी चल रहे थे। इस साल की जंबू सवारी में कुल 12 प्रशिक्षित हाथी शामिल हो रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि और शाही उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण अनुष्ठान के दौरान कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। इनमें मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की पत्नी उषा शिवकुमार, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन शामिल थे। इनके अलावा, शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया, कन्नड़ और संस्कृति मंत्री शिवराज तंगदगी, और मैसूर के शाही वंशज व भाजपा सांसद यदुवीर वाडियार भी उपस्थित थे। प्रशासनिक अधिकारियों में मैसूर पुलिस आयुक्त सीमा लातकर, मुख्य सचिव शालिनी रजनीश, और उपायुक्त लक्ष्मिकांत रेड्डी भी शामिल हुए।
जुलूस का स्वरूप और परंपरा
जंबू सवारी मैसूर पैलेस से शुरू होकर बन्नीमंटप तक जाती है, जहाँ इसका समापन एक पारंपरिक 'मशाल परेड' (टॉर्चलाइट परेड) के साथ होता है। इस शोभायात्रा में सजे-धजे हाथी, पुलिस बैंड, सैन्य घुड़सवार, लोक नर्तक और विभिन्न सरकारी विभागों की रंग-बिरंगी झांकियां शामिल होती हैं, जो कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को दर्शाती हैं। महल परिसर में सुबह से ही जुटे हज़ारों श्रद्धालुओं ने देवी चामुंडेश्वरी के जयकारे लगाकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। इस बार देवी की प्रतिमा को हरी साड़ी पहनाई गई थी।
इनपुट: IANS



