बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की चुनावी एंट्री पर BJP का तंज- 'NOTA से भी कम वोट मिलेंगे'
चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनकी उम्मीदवारी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाज
चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनकी उम्मीदवारी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि प्रशांत किशोर इस चुनाव में अपनी जमानत भी नहीं बचा पाएंगे और उन्हें 'नोटा' से भी कम वोट हासिल होंगे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सीट दशकों से भाजपा का मजबूत किला मानी जाती है।
बांकीपुर सीट पर पहले भाजपा के नितिन नवीन बड़े अंतर से जीतते आए हैं। प्रशांत किशोर के इस राजनीतिक कदम पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने कहा, "वे (किशोर) सिर्फ अपनी जमानत जब्त करवाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें नोटा से भी कम वोट मिलेंगे।"
भाजपा का गढ़ और नेताओं के दावे
भाजपा के एक अन्य वरिष्ठ नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भी इसी तरह की राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, "प्रशांत किशोर चुनाव लड़ें या कोई और, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा पिछले 30 सालों से बांकीपुर विधानसभा सीट जीतती आ रही है।" उन्होंने आगे कहा कि बांकीपुर की जनता बहुत खुश है और इस बार भी भारी बहुमत से भाजपा उम्मीदवार को ही वोट देगी।
वहीं, जनता दल-यूनाइटेड (JDU) के नेता चंद्रेश्वर प्रसाद ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए हर कोई स्वतंत्र है और किसी पर कोई रोक-टोक नहीं है। हालांकि, उन्होंने भी यह जोड़ा, "मेरे हिसाब से, वे (किशोर) इस चुनाव में सफल नहीं होंगे।"
'वैकल्पिक राजनीति' की शुरुआत का दावा
दूसरी तरफ, प्रशांत किशोर ने अपनी जन सुराज पार्टी (JSP) की तरफ से पूरे आत्मविश्वास के साथ चुनाव लड़ने की बात कही है। रविवार को पटना में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव में उनकी जीत राज्य में 'वैकल्पिक राजनीति' की नींव रखेगी। उन्होंने कहा, "पिछले चार सालों से 'जन सुराज' ही मेरी जिंदगी रही है और अगले दस सालों तक मेरा कोई और मकसद नहीं है। मैं बांकीपुर उपचुनाव लड़ने की जिम्मेदारी को उसी लक्ष्य की ओर एक कदम मानता हूं।" किशोर ने कहा कि उनके समर्थकों का मानना है कि इस जीत से आंदोलन को मजबूती मिलेगी और बिहार में बदलाव की उम्मीद फिर से जगेगी।
इनपुट: IANS



