केरल: मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को 2018 बाढ़ राहत कोष मामले में क्लीन चिट, सतर्कता विभाग ने जांच बंद की
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को लगभग आठ साल पुराने एक राजनीतिक विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्य के सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) ने 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्वास के लिए…
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन को लगभग आठ साल पुराने एक राजनीतिक विवाद में बड़ी राहत मिली है। राज्य के सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) ने 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्वास के लिए विदेश से चंदा जुटाने के आरोपों से जुड़ी जांच को बंद कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में मुख्यमंत्री के खिलाफ किसी भी तरह के गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला है।
यह पूरा मामला 2018 की बाढ़ के बाद सतीशन द्वारा अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रभावित परिवारों के लिए घर बनाने की एक पहल से जुड़ा था। इसके लिए उन्होंने ब्रिटेन में मलयाली समुदाय से धन जुटाने का प्रयास किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इस प्रक्रिया में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA के नियमों का उल्लंघन हुआ है।
क्या थे आरोप और जांच का निष्कर्ष?
शिकायत के अनुसार, मनप्पट्टू फाउंडेशन के माध्यम से लगभग 20 लाख रुपए (22,500 जीबीपी) की राशि जुटाई गई थी, जिसे ब्रिटेन स्थित मिडलैंड इंटरनेशनल एड ट्रस्ट के जरिए फाउंडेशन के एफसीआरए खाते में भेजा गया था। आरोप था कि यह लेन-देन एफसीआरए की धारा 3 का उल्लंघन है, जो राजनेताओं को विदेशी चंदा प्राप्त करने से रोकता है। हालांकि, कई वर्षों तक चली विभिन्न जांचों के बाद भी जांचकर्ताओं को सतीशन के खिलाफ कोई आपराधिक या सतर्कता से जुड़ा मामला साबित करने के लिए सबूत नहीं मिल सके।
गृह मंत्री ने दी विस्तृत जानकारी
राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने गुरुवार को इस फैसले की घोषणा करते हुए पत्रकारों से कहा, "इस मामले में विजिलेंस का कोई पहलू नहीं है और केस बंद कर दिया गया है। अब यह साफ हो गया है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित था।" उन्होंने यह भी बताया कि पिछली पिनाराई विजयन सरकार के दौरान हुई दो अलग-अलग जांचों में भी कोई दोषी ठहराने वाला सबूत नहीं मिला था, और वीएसीबी की अंतिम रिपोर्ट ने भी यही पुष्टि की है। गृह मंत्री के अनुसार, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से फाइल की जांच की और पाया कि सतीशन का किसी भी गैरकानूनी काम से कोई संबंध नहीं था।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीपीआई (एम) के पूर्व विधायक जेम्स मैथ्यू ने यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद तत्कालीन वामपंथी सरकार ने सतर्कता जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान सतीशन ने हमेशा विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर कहा कि उन्होंने केवल बाढ़ पीड़ितों के लिए मानवीय सहायता सुनिश्चित करने का काम किया था। वीएसीबी द्वारा मामला बंद किए जाने के साथ ही सतीशन इस लंबे समय से चल रहे विवाद से पूरी तरह दोषमुक्त हो गए हैं।
इनपुट: IANS



