अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता रुकी, अमेरिकी सांसदों ने ही ट्रंप के टैरिफ़ पर उठाए सवाल
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ़ की आलोचना अमेरिका के भीतर ही शुरू हो गई है। कई अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि…
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ़ की आलोचना अमेरिका के भीतर ही शुरू हो गई है। कई अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि इस कदम से कीमतें बढ़ेंगी और दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण आर्थिक संबंधों में अनिश्चितता पैदा होगी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नए टैरिफ़ शनिवार से लागू हो गए हैं, जिसके जवाब में कनाडा ने भी बराबरी के जवाबी शुल्क लगाने की घोषणा की है।
यह टकराव तब हुआ जब दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने इसका दोष कनाडा पर मढ़ते हुए कहा कि ओटावा पहले चर्चा की गई शर्तों को अंतिम रूप देने से मुकर गया। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका ने आखिरी समय में अनुचित और आर्थिक रूप से हानिकारक नई शर्तें रखीं, जिसके कारण ओटावा को बातचीत रोकनी पड़ी। कार्नी के शब्दों में, वॉशिंगटन ने 'बहुत ज्यादा मांग की और बदले में बहुत कम पेशकश की।'
सांसदों ने जताई चिंता
इस व्यापारिक तनाव का असर सीमावर्ती राज्यों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कॉलिन्स ने कहा कि बार-बार शुरू और बंद हो रही इन वार्ताओं से उनके गृह राज्य मेन के व्यवसायों के लिए लागत और जोखिम बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, "अगर प्रशासन इन टैरिफ को लागू करता है, तो मेन के परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।" उन्होंने बताया कि मेन हर साल कनाडा से लगभग 2 अरब डॉलर के गैर-पेट्रोलियम उत्पाद आयात करता है और किसान व मछुआरे आपूर्ति श्रृंखला में कमी को लेकर चिंतित हैं।
इसी तरह, डेमोक्रेटिक सीनेटर पीटर वेल्च ने इन टैरिफ़ को वरमोंट और अन्य उत्तरी सीमा वाले राज्यों के लिए 'एक थप्पड़' बताया। उन्होंने कहा कि दशकों में बने व्यापारिक रिश्ते खतरे में हैं और उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से इस टकराव को खत्म करने का आग्रह किया।
आर्थिक कीमत और जवाबी कार्रवाई
डेमोक्रेट सदस्य प्रतिनिधि रिचर्ड नील ने भी ट्रंप पर अंतिम समय में मांगें बदलने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि इस वार्ता के टूटने की आर्थिक कीमत अमेरिकी कर्मचारियों, व्यवसायों और उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ेगी। कनाडाई सरकार के मुताबिक, अमेरिका लगभग 28 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाने की तैयारी में था। इसके जवाब में ओटावा ने भी समान मूल्य के जवाबी शुल्क लगाने और प्रभावित उद्योगों को सहायता देने का वादा किया है। इस विवाद के बाद कांग्रेस में एक बार फिर राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ़ लगाने के अधिकारों की विधायी समीक्षा की मांग उठने लगी है।
इनपुट: IANS



