पाकिस्तान में अंगों का अवैध कारोबार: गरीबी और कमजोर कानून के गठजोड़ से बना अंतरराष्ट्रीय तस्करी का अड्डा
पाकिस्तान में मानव अंगों का अवैध व्यापार एक संगठित और अंतरराष्ट्रीय रूप ले चुका है, जो न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशी मांगों को भी पूरा कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी…
पाकिस्तान में मानव अंगों का अवैध व्यापार एक संगठित और अंतरराष्ट्रीय रूप ले चुका है, जो न केवल देश के भीतर बल्कि विदेशी मांगों को भी पूरा कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी, कमजोर कानूनी निगरानी और चिकित्सा क्षेत्र में कदाचार का फायदा उठाकर तस्कर कमजोर लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। यह समस्या अब सिर्फ किडनी की तस्करी तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानव जैविक सामग्री के संग्रह, प्रसंस्करण और निर्यात तक फैल गई है।
हाल की घटनाओं ने इस व्यापार के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले होने की पुष्टि की है। जून में इस्लामाबाद में मानव प्लेसेंटा को वियतनाम निर्यात करने की एक कोशिश का पर्दाफाश हुआ था। अधिकारियों के मुताबिक, तस्कर इसे भेड़ के अंगों का गलत लेबल लगाकर विदेश भेज रहे थे। इस मामले में फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने 25 जून को पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिनमें तीन चीनी और दो पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे।
संगठित नेटवर्क और बड़ी गिरफ्तारियां
जांचकर्ताओं ने पाया है कि यह पूरा कारोबार दलालों, चिकित्सा पेशेवरों और बिचौलियों के एक संगठित नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा है। ये लोग फर्जी कागजात तैयार करते हैं, मंजूरियों को दरकिनार करते हैं और सोची-समझी वित्तीय व्यवस्था के तहत अवैध ट्रांसप्लांट को अंजाम देते हैं। 'पाकिस्तान ऑब्जर्वर' की रिपोर्ट में कहा गया, "यह क्रॉस-बॉर्डर पहलू स्थानीय दलालों, विदेशी मरीजों, नकद भुगतान और फर्जी मेडिकल दस्तावेजों को एक साथ लाता है। यह व्यापार वहीं मुनाफा तलाशता है जहां निगरानी सबसे कमजोर होती है।"
इसी साल जून में, FIA के एंटी-करप्शन सर्कल ने दो दलालों को गिरफ्तार किया था। वे कथित तौर पर ईंट भट्ठों और दिहाड़ी पर काम करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर मजदूरों को अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के लिए फुसला रहे थे। यह गिरफ्तारी एक बड़े ऑपरेशन का हिस्सा थी, जिसमें पहले एक डॉक्टर और उसकी टीम के कई सदस्य पकड़े गए थे। अधिकारियों ने बताया कि इस नेटवर्क ने लगभग 187 अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए थे।
लाखों की वसूली, डोनर को मामूली रकम
इस अवैध कारोबार में मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती है, जबकि अंग दान करने वालों (डोनर) को इसका एक बहुत छोटा हिस्सा ही मिलता है। जानकारी के अनुसार, हर ऑपरेशन के लिए मरीजों से 60 लाख से लेकर 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (लगभग 21,500 से 36,000 डॉलर) तक लिए जाते थे। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि पाकिस्तान की असली समस्या बड़ी गिरफ्तारियों की कमी नहीं, बल्कि हर बार छापे के बाद इस नेटवर्क को स्थायी रूप से खत्म करने में विफलता है।
इनपुट: IANS



