बुधवार, 8 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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ऊर्जा सुरक्षा: अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने छोटे न्यूक्लियर रिएक्टरों के लिए किया त्रिपक्षीय समझौता

ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुस

ऊर्जा सुरक्षा: अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने छोटे न्यूक्लियर रिएक्टरों के लिए किया त्रिपक्षीय समझौता
(फोटो: IANS)

ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र समेत अन्य देशों में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) की तैनाती में तेजी लाना है। यह समझौता इन तीनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।

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यह मेमोरेंडम ऑफ कोऑपरेशन (एमओसी) मंगलवार को तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान साइन किया गया। इस पर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने हस्ताक्षर किए।

ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की तकनीक

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस मौके पर ऊर्जा सुरक्षा को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा, "आज दुनिया के सबसे अहम मुद्दों में से एक ऊर्जा सुरक्षा है, जैसा कि हमें होर्मुज जलडमरूमध्य और दूसरी जगहों पर हो रही घटनाओं से याद दिलाया जाता है।" रुबियो के अनुसार, यह समझौता तीनों देशों को "छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) पर मिलकर काम करने में मदद मिलेगी, जो कई मायनों में ऊर्जा उत्पादन का भविष्य है।"

उन्होंने इस समझौते को "हमारी त्रिपक्षीय बातचीत का नतीजा" बताते हुए कहा कि इससे तीनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत होंगी। रुबियो ने जापान और दक्षिण कोरिया के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों का भी स्वागत किया।

सहयोग और भविष्य की योजनाएं

इस समझौते के तहत, तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका मकसद फ्लीट डिप्लॉयमेंट मॉडल को आगे बढ़ाना, प्रोजेक्ट के जोखिम कम करना, बड़े पैमाने पर काम करने के फायदे उठाना, निजी निवेश आकर्षित करना, लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाना और सप्लाई चेन को बेहतर बनाना है। इस पहल से अमेरिकी, जापानी और दक्षिण कोरियाई कंपनियों को अधिक प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा समाधान पेश करने में मदद मिलेगी।

समझौते का स्वागत करते हुए, जापान के विदेश मंत्री मोटेगी ने कहा कि तीनों देशों ने पिछले अक्टूबर से ही महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन और उत्तर कोरिया के साइबर खतरों जैसे मुद्दों पर "ठोस प्रयास" किए हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ने कहा, "हम दुनिया की चुनौतियों का सामना करते हुए मिलकर काम कर सकते हैं।"

इस अवसर पर अमेरिका ने अपने 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर टेक्नोलॉजी के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए बुनियादी ढांचा' कार्यक्रम के लिए 10 मिलियन डॉलर से अधिक की नई फंडिंग की भी घोषणा की। यह राशि इंडो-पैसिफिक देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करने, एसएमआर प्रोजेक्ट के विकास को बढ़ावा देने और कार्यबल विकास के लिए एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र बनाने में मदद करेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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