निज्जर हत्याकांड: अमेरिकी आरोप-पत्र से भारत को राहत, गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर लगे गंभीर आरोप
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है, जिससे भारत और कनाडा के बीच पैदा हुआ राजनयिक तनाव कम हो सकता है। अमेरिका ने इस हत्याकांड में भारतीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में एक बड़ा मोड़ आया है, जिससे भारत और कनाडा के बीच पैदा हुआ राजनयिक तनाव कम हो सकता है। अमेरिका ने इस हत्याकांड में भारतीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी के खिलाफ आरोप तय किए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि यह हत्या एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट की करतूत थी, न कि भारत सरकार की।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अमेरिकी आरोप-पत्र में निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप 33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर लगाया गया है। बिश्नोई, जो 'बिश्नोई गैंग' का सरगना है और कई अपराधों के लिए भारत की जेल में बंद है, पर आरोप है कि उसने जेल से ही हत्या के निर्देश दिए। वहीं, बराड़ ने उत्तरी अमेरिका में गतिविधियों की निगरानी की।
भारत सरकार की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी आरोप-पत्र में भारत सरकार की किसी भी भूमिका का कोई जिक्र नहीं है। कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (सीबीसी न्यूज) की एक रिपोर्ट के अनुसार, रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (आरसीएमपी) की उप आयुक्त लिसा मोरलैंड ने भी एक साक्षात्कार में कहा, "जांच में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला।" उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय सरकार ने जांच में सहयोग किया था।
लॉस एंजिलिस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए सीएनएन ने भी रिपोर्ट किया कि अमेरिकी अधिकारियों ने भारतीय सरकार पर हत्या में शामिल होने या उसकी जानकारी होने का कोई आरोप नहीं लगाया।
कनाडा के आरोपों से पैदा हुआ था राजनयिक संकट
हरदीप सिंह निज्जर एक कनाडाई नागरिक और सिख अलगाववादी नेता था, जिसे भारत ने आतंकवादी घोषित किया हुआ था। 18 जून, 2023 को वैंकूवर के पास 'सरे' शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारतीय सरकारी एजेंटों पर हत्या में शामिल होने के "विश्वसनीय आरोप" लगाए थे, जिसे भारत ने "बेतुका" बताकर सिरे से खारिज कर दिया था। इन आरोपों के कारण दोनों देशों के बीच गंभीर राजनयिक संकट पैदा हो गया, जिसके चलते राजनयिकों को निष्कासित किया गया और द्विपक्षीय संबंध रुक गए थे।
मामले में संगठित अपराध का पहलू
नए अमेरिकी खुलासे इस हत्याकांड को एक राज्य प्रायोजित कार्रवाई के बजाय एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध अभियान के रूप में पेश करते हैं। कनाडा के अखबार 'द ग्लोब एंड मेल' ने भी लिखा है कि अमेरिकी अभियोग में भारतीय सरकारी एजेंटों के हत्या के पीछे होने के दावे का कोई उल्लेख नहीं है। यह घटनाक्रम कनाडा के उन शुरुआती आरोपों को कमजोर करता है, जिन्होंने भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कटघरे में खड़ा कर दिया था।
इनपुट: IANS



