सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल: पाकिस्तान सरकार के फैसले पर वकीलों और PTI ने उठाए गंभीर सवाल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के संघीय सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। देश के प्रमुख वकील संघों ने इसे 'अलोकतांत्रिक' बताते हुए विरोध प्रदर्शन का…

खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल: पाकिस्तान सरकार के फैसले पर वकीलों और PTI ने उठाए गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू करने के संघीय सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना हो रही है। देश के प्रमुख वकील संघों ने इसे 'अलोकतांत्रिक' बताते हुए विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है, वहीं इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इसे एक बड़ी 'राजनीतिक भूल' करार दिया है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिंध हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (SHCBA) और कराची बार एसोसिएशन (KBA) ने इस कदम की निंदा की है। वकीलों ने घोषणा की है कि वे इसके खिलाफ 'काला दिवस' मनाएंगे। कराची बार एसोसिएशन ने सोमवार को काम का बहिष्कार करने और इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक आम बैठक बुलाने का भी फैसला किया है। एसोसिएशन ने सभी पक्षों से लोगों के जनादेश का सम्मान करने और राजनीतिक अस्थिरता से बचने की अपील की है।

सरकार के फैसले की तीखी आलोचना

रविवार को ही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के चेयरमैन गोहर अली खान ने भी सरकार के इस कदम को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हम प्रांत में इमरजेंसी लागू करने की कड़ी निंदा करते हैं... यह बेहद चिंताजनक और गंभीर राजनीतिक गलती और अलोकतांत्रिक कदम है—लोग अपने अधिकारों के खिलाफ ऐसे कदमों को कभी स्वीकार नहीं करेंगे।"

खान ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद को खत्म करने पर कोई असहमति नहीं है, लेकिन इसकी आड़ में लोगों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता या राजनीतिक मकसद हासिल नहीं किए जा सकते। उनके अनुसार, यह फैसला प्रांतीय स्वायत्तता को कमजोर करता है और केंद्र-प्रांत के बीच टकराव पैदा करेगा।

संवाद और संवैधानिक शासन की मांग

गोहर अली खान ने कहा कि समस्याओं का समाधान जोर-जबरदस्ती में नहीं, बल्कि "राजनीतिक समझदारी, संविधान की सर्वोच्चता, सार्थक बातचीत और व्यावहारिक कदमों" में है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि ताकतवर प्रांत ही एक मजबूत संघ की नींव होते हैं। उन्होंने लिखा, "अभी भी समय है; इस फैसले को कुछ दिनों में वापस लिया जा सकता है... राजनीतिक फैसलों पर पुनर्विचार करना कमजोरी की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित में समझदारी की निशानी है—वरना भारी नुकसान होगा।"

यह सारी प्रतिक्रियाएं रविवार को संघीय सरकार द्वारा खैबर पख्तूनख्वा के 12 जिलों में आपातकाल लगाने के बाद आई हैं। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कैबिनेट की सिफारिशों को मंजूरी देते हुए प्रांत में गवर्नर शासन भी लागू कर दिया है।

इनपुट: IANS

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