सूडान: गृहयुद्ध के बीच हैजे का कहर, संयुक्त राष्ट्र ने विस्थापितों के लिए शुरू किया टीकाकरण
गृहयुद्ध की मार झेल रहे सूडान में अब हैजे का प्रकोप भी तेजी से फैल रहा है, जिससे निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद लगातार काम कर रहे हैं। समाचार एजेंसी…
गृहयुद्ध की मार झेल रहे सूडान में अब हैजे का प्रकोप भी तेजी से फैल रहा है, जिससे निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठन सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद लगातार काम कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस गंभीर स्वास्थ्य संकट को देखते हुए उत्तरी दारफुर के ताविला इलाके में 10-दिवसीय हैजा टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है।
इस अभियान का मुख्य लक्ष्य उन 95,000 लोगों को टीके लगाना है जो संघर्ष के कारण विस्थापित हो चुके हैं और शिविरों में रहने को मजबूर हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण पहल शुरू की। WHO के आंकड़ों के मुताबिक, जून में हैजे के प्रकोप की घोषणा के बाद से सूडान के छह राज्यों में लगभग 2,900 मामले सामने आए हैं, और इस बीमारी के चलते 247 लोगों की जान जा चुकी है।
बढ़ती असुरक्षा और विस्थापन का संकट
एक तरफ हैजे की बीमारी है तो दूसरी ओर देश में बढ़ती असुरक्षा लोगों के विस्थापन का बड़ा कारण बन रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने बताया कि पिछले हफ्ते ही उत्तरी दारफुर के उम बारू इलाके से करीब 1,300 लोगों को अपने गांव छोड़ने पड़े। सूडान-चाड सीमा के पास स्थित इस क्षेत्र में कई लोगों ने सुरक्षा के लिए पड़ोसी देश चाड में शरण ली है।
इसी तरह, ब्लू नाइल राज्य के गीसान क्षेत्र में भी सोमवार को असुरक्षा बढ़ने से 3,300 से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए। वहीं, दक्षिण दारफुर के न्याला शहर में मंगलवार को ड्रोन से तीन हमले किए गए। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि इन चुनौतियों के बीच IOM और उसके सहयोगियों ने ताविला समेत कई इलाकों में 12,000 लोगों तक आपातकालीन आश्रय और ज़रूरी घरेलू सामान पहुंचाया है।
संयुक्त राष्ट्र की अपील
OCHA के मुताबिक, दक्षिण और मध्य दारफुर के कुछ हिस्सों में विभिन्न समुदायों के बीच तनाव बढ़ रहा है और हाल के दिनों में कई हिंसक घटनाएं भी हुई हैं। इन गंभीर हालातों को देखते हुए कार्यालय ने एक बार फिर सभी पक्षों से अपील की है कि वे आम नागरिकों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। साथ ही, मानवीय सहायता संगठनों को जरूरतमंदों तक बिना किसी बाधा के सुरक्षित रूप से पहुंचने दिया जाए।
इनपुट: IANS



