नोबेल पुरस्कार विजेता नावी पिल्लै की संयुक्त राष्ट्र ने की प्रशंसा, इजरायल की आलोचना को किया खारिज
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारतीय मूल की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नावी पिल्लै को मिले नोबेल शांति पुरस्कार का स्वागत किया है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों…
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारतीय मूल की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त नावी पिल्लै को मिले नोबेल शांति पुरस्कार का स्वागत किया है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के रक्षकों के लिए एक बड़ा सम्मान बताया है। यह प्रतिक्रिया इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा पिल्लै को पुरस्कार दिए जाने की आलोचना के बाद आई है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुटेरेस ने पिल्लै को बधाई देते हुए कहा, "उन्होंने (नावी पिल्लै) दिखाया है कि कानून की ताकत को बल के कानून पर हावी होना चाहिए और मानवाधिकारों की रक्षा ही अन्याय के खिलाफ सबसे पुख्ता सुरक्षा है।" महासचिव ने आगे कहा कि नोबेल समिति ने इस पुरस्कार के माध्यम से दुनिया को याद दिलाया है कि शांति शक्तिशाली लोगों की इच्छा पर नहीं, बल्कि स्थायी सिद्धांतों पर बननी चाहिए।
मानवाधिकार आंदोलन के लिए गर्व का क्षण
वर्तमान मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने भी इस पुरस्कार को 'वैश्विक मानवाधिकार आंदोलन के लिए गर्व का क्षण' बताया। उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब मानवाधिकारों पर कई मोर्चों पर हमले हो रहे हैं, जिनमें अपार शक्ति रखने वाले लोग भी शामिल हैं, यह पुरस्कार विशेष रूप से मार्मिक है।" टर्क ने पिल्लै को "अंतरराष्ट्रीय कानून का प्रतीक" कहा।
एक लंबा और प्रतिष्ठित करियर
एंटोनियो गुटेरेस ने नावी पिल्लै के दशकों लंबे करियर पर प्रकाश डाला, जिसकी शुरुआत दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला और रंगभेद शासन के खिलाफ खड़े होने वाले अन्य लोगों के बचाव से हुई थी। उन्होंने बताया कि पिल्लै मानवाधिकारों की एक निडर आवाज रही हैं और उन्होंने अपने समय के कई ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिल्लै अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्र पर संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की अध्यक्ष रह चुकी हैं और रवांडा में हुए नरसंहार जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों के मामलों में अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीश के रूप में भी काम कर चुकी हैं।
इनपुट: IANS



