गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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इबोला के खिलाफ लड़ाई में युगांडा निर्णायक मोड़ पर, आखिरी मरीज भी अस्पताल से डिस्चार्ज

युगांडा इबोला के प्रकोप को खत्म करने की कगार पर पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को देश के आखिरी ज्ञात इबोला मरीज को भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद अब 42 दिनों

इबोला के खिलाफ लड़ाई में युगांडा निर्णायक मोड़ पर, आखिरी मरीज भी अस्पताल से डिस्चार्ज
(फोटो: IANS)

युगांडा इबोला के प्रकोप को खत्म करने की कगार पर पहुँच गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को देश के आखिरी ज्ञात इबोला मरीज को भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद अब 42 दिनों की महत्वपूर्ण निगरानी अवधि शुरू हो गई है। यदि इस दौरान कोई नया मामला सामने नहीं आता है, तो युगांडा को आधिकारिक तौर पर इबोला-मुक्त घोषित कर दिया जाएगा।

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राजधानी कंपाला के मुलागो नेशनल रेफरल हॉस्पिटल में एक प्रतीकात्मक डिस्चार्ज समारोह का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री क्रिस बार्योमुंसी ने की। उन्होंने ठीक हुए मरीज को एक प्रमाणपत्र सौंपा, जिसमें पुष्टि की गई थी कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव है और अब उनसे वायरस फैलने का कोई खतरा नहीं है। मंत्री ने कहा, "अब उनकी स्वास्थ्य स्थिति ऐसी नहीं है जिससे खतरा हो। इसलिए वे अपने घर और काम पर वापस जा सकते हैं और पहले की तरह अपनी सामान्य ज़िंदगी शुरू कर सकते हैं।"

समाज में वापसी की अपील

स्वास्थ्य मंत्री बार्योमुंसी ने लोगों और संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे ठीक हुए मरीज का स्वागत करें ताकि वे आसानी से समाज में फिर से शामिल हो सकें। यह कदम वायरस से जुड़े सामाजिक भेदभाव को खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

युगांडा में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधि कासोंडे मविंगा ने इस सफलता का श्रेय देश की बेहतरीन तैयारियों को दिया। उन्होंने कहा कि अच्छी तैयारी के कारण ही इस प्रकोप को काबू में रखा जा सका और इससे निपटने वाली टीमें पूरी तरह सतर्क रहीं। मविंगा ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इस प्रकोप में मृत्यु दर दस प्रतिशत से कम रही, जो इबोला के इतिहास में सबसे कम दरों में से एक है।

प्रकोप की पृष्ठभूमि और आँकड़े

युगांडा में इबोला के इस प्रकोप की पुष्टि 15 मई को हुई थी। इसका स्रोत पड़ोसी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) से आया एक यात्री था, जिसमें वायरस के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की पुष्टि हुई थी। तब से लेकर अब तक देश में कुल 20 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें 15 कांगो के और 5 युगांडा के नागरिक शामिल हैं। इस प्रकोप के दौरान दो मरीजों की मौत हुई है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार, जब आखिरी पुष्टि हुए मरीज से वायरस फैलने की क्षमता खत्म हो जाती है (या तो वह ठीक हो जाए या उसकी मृत्यु हो जाए), उसके बाद अगर लगातार 42 दिनों तक कोई नया मामला नहीं आता, तो प्रकोप को समाप्त मान लिया जाता है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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