AI का नाम अब 'सुपर इंटेलिजेंस': ट्रंप प्रशासन और गूगल, मेटा जैसी टेक कंपनियों के बीच ऐतिहासिक सुरक्षा समझौता
दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद भविष्य की 'सुपर इंटेलिजेंस' टेक्नोलॉजी को सुरक्षित और…
दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद भविष्य की 'सुपर इंटेलिजेंस' टेक्नोलॉजी को सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस समझौते के तहत ये कंपनियां एडवांस्ड इंटेलिजेंस सिस्टम विकसित करते समय कड़े सुरक्षा उपायों, स्वतंत्र ऑडिट और बोर्ड-स्तरीय निगरानी के लिए प्रतिबद्ध हुई हैं।
इस समझौते, जिसे 'व्हाइट हाउस अकॉर्ड ऑन सुपर इंटेलिजेंस' नाम दिया गया है, में यह सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर नियंत्रण की व्यवस्था की गई है कि ये शक्तिशाली सिस्टम अपने तय इरादे के मुताबिक ही काम करें। इस पर हस्ताक्षर करने वालों में गूगल के सुंदर पिचाई, मेटा के मार्क जुकरबर्ग, ओपनएआई के ग्रेग ब्रॉकमैन, एक्सएआई के एलन मस्क, एंथ्रॉपिक के डारियो अमोदेई और एनवीडिया के जेनसेन हुआंग जैसे दिग्गज शामिल हैं।
समझौते की चार-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था
इस संयुक्त प्रतिबद्धता के तहत कंपनियों को चार प्रमुख स्तरों पर काम करना होगा:
- आंतरिक नियंत्रण: सबसे पहले, कंपनियां अपने मॉडल्स की ट्रेनिंग और तैनाती के दौरान उनकी क्षमताओं पर नजर रखने के लिए मजबूत आंतरिक नियंत्रण लागू करेंगी। ये उपाय साइबर सुरक्षा, बायो-सिक्योरिटी और रासायनिक खतरों जैसे क्षेत्रों को कवर करेंगे ताकि यह सुनिश्चित हो कि मॉडल गलती से भी किसी सिस्टम को हैक न करें।
- आंतरिक टीम: दूसरे स्तर पर, हर कंपनी एक आंतरिक टीम बनाएगी जो यह जांचेगी कि सभी नियंत्रण और निगरानी प्रणालियां ठीक से काम कर रही हैं या नहीं और किसी भी खामी को तुरंत दूर किया जा रहा है।
- स्वतंत्र ऑडिट: तीसरे स्तर पर, एक स्वतंत्र बाहरी ऑडिटर को लाया जाएगा जो यह प्रमाणित करेगा कि सुरक्षा उपाय वास्तव में प्रभावी हैं।
- बोर्ड की निगरानी: अंत में, हर कंपनी का निदेशक मंडल (Board of Directors) एक स्वतंत्र समिति बनाएगा। यह समिति पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी और ऑडिटर्स की रिपोर्टों के आधार पर सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
अब AI नहीं, 'सुपर इंटेलिजेंस' (SI)
इस समझौते के साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिकी सरकारी कामकाज में अब 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) की जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' (SI) शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि नया नाम टेक्नोलॉजी की क्षमताओं को बेहतर तरीके से दर्शाता है। उन्होंने व्हाइट हाउस में कहा, "यह एक्सट्रीम इंटेलिजेंस है... लेकिन 'सुपर' शब्द सबसे अच्छा और सबसे सरल भी है।"
ट्रंप ने इस टेक्नोलॉजी के विकास को चीन के साथ एक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बताते हुए कहा, "जो भी सुपर इंटेलिजेंस जीतेगा, वही जीतेगा।" व्हाइट हाउस ने एडवांस कंप्यूटिंग को अपने तकनीकी और आर्थिक एजेंडे के केंद्र में रखा है। साथ ही, प्रशासन ने सरकारी सेवाओं के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म America.gov भी लॉन्च किया है, जो नागरिकों की मदद के लिए 'सुपर इंटेलिजेंस' का उपयोग करेगा।
इनपुट: IANS



