त्रिपुरा: DGP अनुराग की मौत पर विधानसभा में फिर हंगामा, सरकार और विपक्ष आमने-सामने
त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग की रहस्यमयी मौत का मामला एक बार फिर राज्य विधानसभा में गूंजा, जहाँ शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग की रहस्यमयी मौत का मामला एक बार फिर राज्य विधानसभा में गूंजा, जहाँ शुक्रवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, हंगामे के दौरान विपक्षी विधायक सदन के वेल तक पहुँच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यह गतिरोध मुख्यमंत्री माणिक साहा के बयान देने पर सहमत होने के बाद ही समाप्त हुआ।
विपक्षी दल, जिसमें CPI(M) और कांग्रेस शामिल हैं, इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे। नेता प्रतिपक्ष जितेंद्र चौधरी के नेतृत्व में CPI(M) के विधायक विरोध जताते हुए सदन के बीचों-बीच पहुँच गए। विधानसभा अध्यक्ष राम पाडा जमातिया के बार-बार अनुरोध करने और मुख्यमंत्री द्वारा इस विषय पर बयान देने की सहमति के बाद ही वे अपनी सीटों पर वापस लौटे।
मुख्यमंत्री का बयान और विपक्ष की मांग
गृह मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सदन को बताया कि 20 जुलाई को DGP अनुराग का शव राज्य पुलिस मुख्यालय में उनके कार्यालय से सटे शौचालय में लटका हुआ मिला था और मृत्यु का कारण प्रथम दृष्टया आत्महत्या प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 194 के तहत, वे जनहित और पारदर्शिता के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दे सकते हैं।
हालांकि, अध्यक्ष जमातिया ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के बयान के बाद तत्काल किसी बहस की अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि यह बयान त्रिपुरा विधानसभा की कार्य प्रक्रिया के नियम 361 के तहत दिया गया था, जिसके अंतर्गत तुरंत चर्चा नहीं की जा सकती। इस पर विपक्ष ने सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
न्यायिक जांच की मांग पर अड़ा विपक्ष
विपक्षी नेता जितेंद्र चौधरी और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुदीप रॉय बर्मन ने इस घटना को भारत में अभूतपूर्व बताया, जहाँ किसी सेवारत राज्य पुलिस प्रमुख की मौत उनके ही कार्यालय में हो जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल उन्हें इस महत्वपूर्ण मामले पर बहस करने से रोक रहा है। दोनों दलों ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि मामले की जांच त्रिपुरा उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग से कराई जानी चाहिए।
सरकार ने जांच का भरोसा दिया
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार DGP की मौत के पीछे की सच्चाई का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस ने एक गहन जांच शुरू कर दी है, जिसकी निगरानी पुलिस महानिरीक्षक (कानून-व्यवस्था) मंचक इप्पर कर रहे हैं। जांच दल पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य सभी प्रासंगिक सामग्रियों की जांच कर रहा है और इस सिलसिले में दिल्ली का दौरा भी कर चुका है। मुख्यमंत्री ने जांच पूरी होने तक किसी भी तरह की अटकलों से बचने का आग्रह किया है।
इनपुट: IANS



