तमिलनाडु में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बदली, अब 5 आसान ऑनलाइन चरणों में पूरा होगा काम
तमिलनाडु में अब घर, अपार्टमेंट या प्लॉट जैसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन करवाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। राज्य के रजिस्ट्रेशन विभाग ने एक नई ऑनलाइन प्रणाली शुरू की है, जिसमें खरीदार और…
तमिलनाडु में अब घर, अपार्टमेंट या प्लॉट जैसी प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन करवाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। राज्य के रजिस्ट्रेशन विभाग ने एक नई ऑनलाइन प्रणाली शुरू की है, जिसमें खरीदार और विक्रेता बिना सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के चक्कर लगाए पांच चरणों में यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह सुविधा विभाग के STAR 3.0 सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है।
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए लंबी कतारों में लगने या टोकन लेने की जरूरत खत्म हो जाएगी। शुरुआती तौर पर, इस ऑनलाइन सुविधा में नए बने अपार्टमेंट, घर और आवासीय प्लॉट की बिक्री के दस्तावेज़ (सेल डीड) शामिल किए गए हैं। साथ ही, होम लोन से जुड़े दस्तावेज़ भी इसके दायरे में आते हैं।
कैसे काम करती है यह ऑनलाइन प्रक्रिया?
यह पूरी प्रक्रिया पांच मुख्य चरणों में बंटी है।
पहला चरण: अकाउंट और जानकारी दर्ज करना
सबसे पहले, खरीदारों को रजिस्ट्रेशन विभाग की वेबसाइट पर एक अकाउंट बनाना होगा। इसके बाद उन्हें उस दस्तावेज़ को चुनना होगा जिसका रजिस्ट्रेशन कराना है और एक ऐसा केंद्र चुनना होगा जहाँ फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैनिंग जैसी बायोमेट्रिक सुविधाएँ उपलब्ध हों। आवेदकों को प्रॉपर्टी के पुराने मालिकाना हक (टाइटल डीड) और खरीदार, विक्रेता व गवाहों की पहचान से जुड़ी जानकारी अपलोड करनी होगी। प्रॉपर्टी का प्रकार, सर्वे नंबर, क्षेत्रफल और भुगतान के तरीके जैसी सभी जरूरी जानकारी दर्ज करने के बाद सिस्टम अपने-आप एक ड्राफ्ट डीड तैयार कर देगा।
दूसरा चरण: दस्तावेज़ जमा करना और सत्यापन
दूसरे चरण में, तैयार किए गए ड्राफ्ट को "माय डॉक्यूमेंट्स" सेक्शन से जमा करना होता है। इसके बाद आधार प्रमाणीकरण और संबंधित लोगों के बायोमेट्रिक विवरण (फिंगरप्रिंट, फोटो और आइरिस) दर्ज किए जाते हैं।
तीसरा और चौथा चरण: भुगतान और सहमति
तीसरे चरण में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान किया जाता है। इसके बाद चौथे चरण में आवेदक को रजिस्ट्रेशन के लिए अपनी ऑनलाइन सहमति देनी होती है, जिसके साथ ही उसकी तरफ से प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
पांचवां चरण: अधिकारी द्वारा अंतिम मंजूरी
आखिरी चरण में, संबंधित रजिस्ट्रार 24 घंटे के भीतर सभी दस्तावेजों की जांच करते हैं। अगर सब कुछ सही पाया जाता है, तो वे दस्तावेज़ पर डिजिटल हस्ताक्षर कर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर देते हैं। इसके बाद रजिस्टर्ड दस्तावेज़ आवेदक के अकाउंट में डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाता है।
अन्य कौन से दस्तावेज़ हो सकेंगे रजिस्टर?
इस ऑनलाइन सिस्टम के जरिए होम लोन के लिए टाइटल डीड जमा करने का मेमोरेंडम, मॉर्गेज डीड (बंधक विलेख) और लोन बंद होने की रसीदें भी रजिस्टर कराई जा सकती हैं। चूँकि सभी के घरों में बायोमेट्रिक उपकरण नहीं होते, इसलिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रॉपर्टी डेवलपर्स या बिक्री करने वाली कंपनियों के कार्यालयों में बने केंद्रों पर पूरी की जा सकती है।
इनपुट: IANS



