तमिलनाडु: 6 विधानसभा क्षेत्र खाली होने पर सदन में हंगामा, सरकार और विपक्ष में तीखी नोकझोंक
तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को छह निर्वाचन क्षेत्रों में विधायक न होने का मुद्दा गरमा गया, जिसके कारण सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बहस उस समय शुरू हुई…
तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को छह निर्वाचन क्षेत्रों में विधायक न होने का मुद्दा गरमा गया, जिसके कारण सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बहस उस समय शुरू हुई जब प्राकृतिक संसाधनों, उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विभागों के लिए अनुदान की मांगों पर चर्चा चल रही थी।
बहस की शुरुआत करते हुए DMK विधायक ऑस्टिन ने सवाल उठाया कि जिन छह विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है, वहां के नागरिक अपनी शिकायतें लेकर किसके पास जाएं। उन्होंने इस व्यवस्था पर चिंता जताते हुए चुने हुए प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति से होने वाली समस्याओं को रेखांकित किया।
सरकार का जवाब और विपक्ष की आपत्ति
इस सवाल पर सरकार की ओर से मंत्री के.ए. सेंगोट्टैयन ने जवाब दिया। उन्होंने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देशों पर सभी छह निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रभारी मंत्री नियुक्त किए गए हैं ताकि जनता की समस्याओं का समाधान हो सके। हालांकि, विधायक ऑस्टिन इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए और कहा कि कई समस्याएं अब भी जस की तस हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अतिरिक्त प्रभार वाले मंत्री स्थानीय मुद्दों को उस गहराई से नहीं समझ सकते जैसे एक चुना हुआ विधायक समझता है।
इस चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी चुने हुए प्रतिनिधि के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विधायकों का मुख्य काम ही अपने क्षेत्र का समर्पित प्रतिनिधित्व करना होता है और पूरे विभाग संभालने वाले मंत्रियों से हर स्थानीय मुद्दे को समझने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
चुनाव कराने को लेकर हुई तीखी बहस
विपक्षी नेताओं की चिंताओं पर मंत्री सेंगोट्टैयन ने कहा कि सरकार भी इन खाली सीटों पर जल्द से जल्द चुनाव कराने की इच्छुक है। उन्होंने कहा, "चुनाव कराने का कोई विकल्प नहीं है और हम यह सुनिश्चित करने में रुचि रखते हैं कि वे जल्द से जल्द हों।"
उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा बढ़ गया और पलानीस्वामी समेत AIADMK के कई सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया, जिससे तीखी बहस छिड़ गई। इस दौरान स्पीकर जे.सी.डी. प्रभाकर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि लंबित कानूनी कार्यवाही से जुड़ी कुछ टिप्पणियों को विधानसभा के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।
बढ़ता तनाव और स्पीकर का हस्तक्षेप
जब पलानीस्वामी का माइक्रोफोन बंद कर दिया गया तो सदन में तनाव और बढ़ गया। मंत्री सेंगोट्टैयन ने कथित राजनीतिक खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) का उल्लेख किया, जिस पर स्पीकर ने उन्हें ऐसी टिप्पणियों से बचने की सलाह दी। इसके बाद मंत्री ने सवाल किया कि क्या एडप्पादी निर्वाचन क्षेत्र से TVK उम्मीदवार का नाम वापस लेना खरीद-फरोख्त नहीं था।
इस आरोप का पलानीस्वामी ने जोरदार खंडन किया और स्पष्ट किया कि उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया था, बल्कि उसका नामांकन रद्द हुआ था। जब वह लगातार बोलते रहे तो स्पीकर ने अपनी कुर्सी से उठकर कहा कि क्या सदन को जनसभा समझा जा रहा है। इस पर पलानीस्वामी ने जवाब दिया कि अगर उन्हें बोलने नहीं दिया गया तो उनके पास खड़े रहने के अलावा कोई चारा नहीं है। स्पीकर ने उन्हें शांत रहने की सलाह दी, जिसके बाद सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
इनपुट: IANS



