मध्य प्रदेश: बौद्ध मठों के पते पर बन रहे थे फर्जी पासपोर्ट, STF ने 6 राज्यों में फैलाया जांच का दायरा
मध्य प्रदेश में एक बड़े संगठित फर्जी पासपोर्ट रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें बौद्ध मठों के पतों का इस्तेमाल कर जाली दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल टास्क…
मध्य प्रदेश में एक बड़े संगठित फर्जी पासपोर्ट रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें बौद्ध मठों के पतों का इस्तेमाल कर जाली दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अब तक लगभग 70 ऐसे फर्जी पासपोर्ट बरामद किए हैं और इस सिलसिले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका के चलते जांच का दायरा अब छह राज्यों तक बढ़ा दिया गया है।
एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोधा ने शुक्रवार को बताया कि यह एक बहुस्तरीय मामला है जिसकी जांच अभी जारी है। उन्होंने कहा, "अब तक छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें दो दिन पहले की गई ताजा गिरफ्तारी भी शामिल है।" गिरफ्तार किए गए लोगों में गयाप्रसाद गौतम (23 सितंबर को गिरफ्तार), रियाल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद, विप्लब अधिकारी, प्रियन रॉय, जॉय चौधरी और नसीम अख्तर शामिल हैं।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच में सामने आया है कि इस रैकेट ने भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा, डबरा और पाहुर्ना जैसे शहरों में स्थित बौद्ध मठों के पतों का बार-बार इस्तेमाल किया। सबसे ज्यादा 40 मामले भोपाल के अन्नानगर से, 17 डबरा से, 11 बैतूल के आमला बौद्ध मठ से और 2 मामले छिंदवाड़ा-पाहुर्ना से जुड़े पाए गए हैं।
एसटीएफ के मुताबिक, गवाहों के इस्तेमाल में भी एक खास पैटर्न दिखा। बरामद हुए 70 में से करीब 50 पासपोर्ट आवेदनों में सिर्फ तीन लोग — गया प्रसाद गौतम, गुलाब राय और रियाल चौधरी उर्फ भंते मेतानंद — गवाह के तौर पर सामने आए। कई आवेदनों में उनके मोबाइल नंबर भी दर्ज हैं। एक ही पते और गवाहों का बार-बार इस्तेमाल ही इस रैकेट के खुलासे का अहम सुराग बना।
अब छह राज्यों तक फैली जांच
इस नेटवर्क के तार मध्य प्रदेश के अलावा असम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब से भी जुड़ रहे हैं। STF की टीमें इन राज्यों में संदिग्धों का पता लगाने में जुटी हैं। डीआईजी लोधा ने बताया, "हमने अब तक 75 आरोपियों की पहचान की है।" जांचकर्ताओं को कुछ मुख्य आरोपियों के बीच संबंध भी मिले हैं। उदाहरण के लिए, गुलाब राय और रियाल चौधरी की मुलाकात बैतूल और झांसी के कैंपों में हुई थी।
डीआईजी राहुल लोधा ने यह भी बताया, "जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मदद से पासपोर्ट तैयार किए गए थे। पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।"
इनपुट: IANS



