कोरियाई प्रायद्वीप में शांति के लिए दक्षिण कोरिया प्रतिबद्ध, राष्ट्रपति ली ने अमेरिका-उत्तर कोरिया वार्ता की फिर पेशकश की
कोरियाई प्रायद्वीप में दशकों से चले आ रहे तनाव को समाप्त करने की दिशा में दक्षिण कोरिया ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कहा है कि उनकी सरकार उत्तर कोरिया और…
कोरियाई प्रायद्वीप में दशकों से चले आ रहे तनाव को समाप्त करने की दिशा में दक्षिण कोरिया ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने कहा है कि उनकी सरकार उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू कराने में मदद करने के लिए तैयार है, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया के प्रति अमेरिकी रुख में कुछ नरमी के संकेत मिल रहे हैं।
बुधवार को सोल के पश्चिम में स्थित इंचियोन में 'पीसफुल यूनिफिकेशन एडवाइजरी काउंसिल' की अमेरिकी इकाई की एक बैठक में राष्ट्रपति ली ने कहा कि उनकी सरकार अंतर-कोरियाई संबंधों में लंबे समय से चली आ रही दरार को पाटने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, "चूंकि राष्ट्रपति ट्रंप के दृढ़ संकल्प से कोरियाई प्रायद्वीप की स्थिति में बदलाव की संभावना बनी है... इसलिए हमें अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच विश्वास बनाने और बातचीत फिर से शुरू करने के लिए माहौल तैयार करना चाहिए।"
शांति संधि की आवश्यकता क्यों?
दरअसल, 1950-53 के बीच हुआ कोरियाई युद्ध किसी शांति संधि के साथ नहीं, बल्कि केवल एक युद्धविराम समझौते (Armistice) के साथ समाप्त हुआ था। तकनीकी रूप से दोनों कोरियाई देश आज भी युद्ध की स्थिति में हैं। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए ली ने कहा, "हमें संघर्ष और टकराव पर आधारित युद्धविराम समझौते को सहयोग और समृद्धि पर आधारित शांति व्यवस्था से बदलना चाहिए।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश अनावश्यक टकराव में अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहे हैं, जो एक "दुर्भाग्यपूर्ण" और "दुखद" वास्तविकता है।
बातचीत और सह-अस्तित्व पर जोर
राष्ट्रपति ली ने अपने उस तीन-सूत्रीय कार्य-योजना को भी दोहराया, जिसे उन्होंने 15 अगस्त को 'लिबरेशन डे' के भाषण में पेश किया था। इसमें समावेशी, स्थिर और जिम्मेदार दृष्टिकोण शामिल हैं। उन्होंने कहा, "समावेशी शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए, (दक्षिण और उत्तर कोरिया को) एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। शांति तब शुरू होती है जब वे अपने मतभेदों का सम्मान करते हैं, न कि तब जब सभी एक जैसा सोचते हैं।" ली ने स्पष्ट किया कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति केवल दोनों देशों का मुद्दा नहीं, बल्कि यह पूर्वोत्तर एशिया की सुरक्षा और विश्व शांति के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इनपुट: IANS



