राजस्थान: 2 करोड़ की रिश्वत के हाई-प्रोफाइल मामले में SOG के ASP मुकेश सोनी निलंबित
राजस्थान सरकार ने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मुकेश कुमार सोनी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उदयपुर में 272 भूखंडों से जुड़े एक मामले को रफा-दफा करने के बदले 2…
राजस्थान सरकार ने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) मुकेश कुमार सोनी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उदयपुर में 272 भूखंडों से जुड़े एक मामले को रफा-दफा करने के बदले 2 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत मांगने के आरोप में उनकी गिरफ्तारी के बाद हुई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की सिफारिश पर गृह विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद यह आदेश जारी किया।
मुकेश सोनी का निलंबन 27 सितंबर से प्रभावी माना गया है, जिस दिन उन्हें ACB ने गिरफ्तार किया था। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के शामिल होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उदयपुर के 272 भूखंडों से जुड़े एक पुराने विवाद से जुड़ा है। आरोप है कि इन भूखंडों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनका मालिकाना हक बदला गया और फिर उन्हें बेच दिया गया। इस मामले की जांच SOG कर रही थी, जिसमें मुकेश सोनी तैनात थे। 2022 में इस संबंध में सूरजपोल थाने में FIR दर्ज की गई थी।
ACB के मुताबिक, सोनी पर आरोप है कि उन्होंने इस केस के आरोपियों को राहत देने और जब्त सामान लौटाने के एवज में 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह रिश्वत दो बिचौलियों के जरिए लेने की योजना बनाई गई थी।
ACB ने कैसे की कार्रवाई?
शिकायत मिलने के बाद ACB ने तीन दिनों तक डिजिटल रिकॉर्डिंग के जरिए रिश्वत की मांग का सत्यापन किया। एजेंसी के अनुसार, इस दौरान एक कथित बिचौलिए ने शिकायतकर्ता और सोनी के बीच दो व्हाट्सएप कॉल भी कराईं। पुष्टि होने के बाद, ACB ने 26 सितंबर को कथित बिचौलिए सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को 2 करोड़ रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन, 27 सितंबर को ASP मुकेश सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच में हुए कई खुलासे
जांच के दौरान ACB की टीम सज्जन सिंह को सोनी के आवास पर ले गई, जहां दोनों के बीच अक्सर मुलाकात होने की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं को सोनी के कार्यालय से 41 भूखंडों से संबंधित फाइलें भी मिली हैं, जिन पर यूडीए (शहरी विकास प्राधिकरण) की मुहर और हस्ताक्षर हैं। अब इन दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जा रही है।
एसीबी के अनुसार, रिश्वत की रकम पर आमने-सामने बात करने की बजाय सोनी ने अपने मोबाइल फोन पर टाइप करके जानकारी दी थी। जांच में यह भी पता चला है कि 23 सितंबर को शिकायतकर्ता से होने वाली मुलाकात का समय सोनी ने तीन बार बदला था और अंत में वह खुद डेढ़ घंटे की देरी से पहुंचे थे।
इनपुट: IANS



