सऊदी तेल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों का हमला? कच्चा तेल फिर महंगा, ब्रेंट 115 डॉलर के पार
पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा मिसाइल हमले की अपुष्ट खबरों के बाद बुधवार को कच्चे…
पश्चिम एशिया में एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। सऊदी अरब की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा मिसाइल हमले की अपुष्ट खबरों के बाद बुधवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।
यह तेजी मंगलवार को आई गिरावट के ठीक बाद हुई है, जब कीमतों में करीब 2 डॉलर प्रति बैरल की नरमी देखी गई थी। तब बाजार में यह उम्मीद बनी थी कि मध्य पूर्व में तनाव कम करने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयास सफल हो सकते हैं। हालांकि, हमले की खबर ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
तेल की कीमतों पर असर
बुधवार के कारोबार में ब्रेंट क्रूड का दिसंबर वायदा अनुबंध 1.55 डॉलर (1.36%) बढ़कर 115.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी मानक वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1.43% की बढ़त के साथ 101.32 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ईरान समर्थित हूती समूह ने सऊदी रिफाइनरी को निशाना बनाने का दावा किया है, जिसकी क्षमता लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन बाजार में आपूर्ति संकट की चिंता हावी हो गई है।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की चिंताएं
सऊदी अरब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक और सबसे बड़ा निर्यातक है, इसलिए वहां की कोई भी अस्थिरता सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करती है। विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दबाव बना हुआ है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। संघर्ष से पहले दुनिया का लगभग 20% ऊर्जा शिपमेंट इसी रास्ते से होता था। पिछले हफ्ते भी जब ईरान ने इस क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमला किया था, तब ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया था, जो अप्रैल के बाद का उच्चतम स्तर था।
उत्पादन और कूटनीति का भविष्य
इस बीच, रविवार को तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक+ की बैठक होने वाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक में दिसंबर के लिए उत्पादन लक्ष्यों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, क्योंकि सऊदी अरब, रूस और इराक जैसे प्रमुख सदस्य देश पहले से ही अपने निर्धारित कोटे से कम उत्पादन कर रहे हैं। हाल ही में तेहरान में सऊदी अरब, तुर्किये, पाकिस्तान और ईरान के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय तनाव कम करने पर बातचीत की थी और संवाद जारी रखने पर सहमति जताई थी। विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले समय में तेल बाजार की दिशा इन्हीं कूटनीतिक प्रयासों की सफलता और भू-राजनीतिक तनाव के बीच तय होगी।
इनपुट: IANS



