गुरूवार, 16 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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चेन्नई नगर निगम में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, रिश्वत और टेंडर घोटाले में छह अधिकारी निलंबित

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन अधिकारियों पर रिश्वतखोरी, टेंडर प्रक्रिया म

चेन्नई नगर निगम में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार, रिश्वत और टेंडर घोटाले में छह अधिकारी निलंबित
(फोटो: IANS)

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन अधिकारियों पर रिश्वतखोरी, टेंडर प्रक्रिया में धांधली और वित्तीय गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोप हैं। निगम आयुक्त जी.एस. समीरन ने प्रारंभिक जांच के बाद यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की, जिसका उद्देश्य नगर प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करना है।

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निलंबित किए गए अधिकारियों में चार वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। निगम ने इन सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है और चार अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की भी सिफारिश की है। यह कदम कई शिकायतों के बाद उठाया गया, जिनमें अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।

जांच के दायरे में क्या-क्या है?

विभागीय जांच में मुख्य रूप से कई गंभीर आरोपों को शामिल किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, शिकायतों में कहा गया है कि कुछ अधिकारियों ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे लिए, सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल किया और वित्तीय लेनदेन में भी अनियमितताएं कीं। जिन मामलों में पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उनमें आपराधिक जांच भी आगे बढ़ाई जाएगी।

इस जांच के तहत, खरीद से जुड़े सभी दस्तावेज, टेंडर आवंटन की प्रक्रिया और वित्तीय रिकॉर्ड की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात का भी पता लगा रही हैं कि यह केवल कुछ अधिकारियों की मिलीभगत थी या इसमें ठेकेदारों का भी कोई बड़ा नेटवर्क शामिल है।

क्या है चिकित्सा उपकरण खरीद का मामला?

निलंबित होने वालों में मनाली और माधवरम के जोनल स्वास्थ्य अधिकारी भी हैं, जिन्हें 9 जुलाई को निलंबित किया गया था। उन पर करीब 9 लाख रुपये के चिकित्सा उपकरणों की खरीद में अनियमितता बरतने का आरोप है। कॉरपोरेशन का आरोप है कि इस खरीद के दौरान फर्जी बिल पेश किए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस गड़बड़ी से निगम को कोई वित्तीय नुकसान हुआ है या नहीं।

ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया है कि वह भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाता है और नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इनपुट: IANS

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