महाराष्ट्र में सूखे का संकट: शरद पवार ने किसानों की 100% कर्ज माफी और तत्काल राहत की मांग की
महाराष्ट्र के कई इलाके गंभीर सूखे की चपेट में हैं, जिससे किसानों और पशुओं के लिए संकट गहरा गया है। इस स्थिति का जायजा लेने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने…
महाराष्ट्र के कई इलाके गंभीर सूखे की चपेट में हैं, जिससे किसानों और पशुओं के लिए संकट गहरा गया है। इस स्थिति का जायजा लेने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को पुणे जिले के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा शुरू किया। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने खेतों में जाकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया और सीधे किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।
अपने दौरे के दौरान पवार ने बारामती, पुरंदर और दौंड तालुका के गांवों में जमीनी हकीकत को देखा। पुरंदर तालुका के परिंचे गांव में लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य सरकार से किसानों का 100 प्रतिशत कृषि कर्ज तुरंत माफ करने और अन्य जरूरी राहत कदम उठाने की मांग की।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
पवार ने कहा कि संकट इतना गंभीर है कि राज्य सरकार को सीधे हस्तक्षेप करना होगा। उन्होंने बताया कि कुछ इलाकों को तो सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, लेकिन पुरंदर जैसे कई बुरी तरह प्रभावित क्षेत्र अभी भी आधिकारिक सूची से बाहर हैं। उन्होंने कहा, “बारिश की कमी के कारण किसानों और पशुओं के लिए जीवन मुश्किल हो गया है। मेरी प्राथमिकता सरकार पर जल्द कदम उठाने के लिए दबाव बनाना है, ताकि खेतों में बची फसलों को बचाया जा सके।”
उन्होंने कहा कि वह इस मामले को लेकर व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलेंगे और ग्रामीणों की मांगों को उनके सामने रखेंगे। पवार ने यह भी बताया कि 27 सितंबर को उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुरंदर और सूची से बाहर रह गए अन्य तालुकों को भी आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की थी।
17-सूत्रीय राहत पैकेज का प्रस्ताव
शरद पवार ने राज्य के 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद सरकार से किसानों, खेतिहर मजदूरों और छात्रों के लिए 17-सूत्रीय राहत पैकेज लागू करने का आग्रह किया है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- आर्थिक सहायता: किसानों को तत्काल प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपए और भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को 25 हजार रुपए की मदद दी जाए।
- कर्ज माफी: सहकारी, राष्ट्रीयकृत और अन्य वित्तीय संस्थानों से लिए गए सभी कृषि और संबंधित व्यवसाय के कर्ज 100% माफ किए जाएं।
- बिजली बिल: कृषि पंपों के बिजली बिल माफ हों और सूखाग्रस्त इलाकों में बिजली कनेक्शन काटने पर रोक लगे।
- छात्रों को राहत: प्रभावित परिवारों के छात्रों की स्कूल-कॉलेज की ट्यूशन, हॉस्टल और मेस फीस माफ की जाए।
- पशु और अनाज: पशुओं की देखभाल के लिए सहायता राशि सीधे बैंक खातों में जमा हो और खेतिहर मजदूरों के परिवारों को 25 किलो मुफ्त अनाज मिले।
इसके अलावा, पवार ने मनरेगा के नियमों में ढील देने, पानी के टैंकरों की मंजूरी का अधिकार तहसीलदारों को देने और सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए महाराष्ट्र विधानमंडल का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की, ताकि त्योहारों से पहले लोगों तक मदद पहुंच सके।
इनपुट: IANS



