यूक्रेन संघर्ष: मनीला में मिले रूस और अमेरिका के विदेश मंत्री, 'एंकोरेज फॉर्मूले' पर हुई चर्चा
रूस और अमेरिका के बीच यूक्रेन संघर्ष को लेकर एक अहम राजनयिक बैठक हुई है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो ने मुलाकात की, जिसमें…
रूस और अमेरिका के बीच यूक्रेन संघर्ष को लेकर एक अहम राजनयिक बैठक हुई है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उनके अमेरिकी समकक्ष मार्को रूबियो ने मुलाकात की, जिसमें मॉस्को ने 'एंकोरेज फॉर्मूले' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह बैठक गुरुवार को आसियान मंत्रिस्तरीय बैठकों के दौरान हुई।
बैठक के दौरान सर्गेई लावरोव ने यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए रूस की तत्परता पर ज़ोर दिया। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री को युद्ध क्षेत्र की ताज़ा स्थिति से अवगत कराया और इस बात पर बल दिया कि यूक्रेन को आगे हथियारों की आपूर्ति नहीं की जानी चाहिए। रूसी मीडिया के अनुसार, लावरोव ने कहा कि मॉस्को एंकोरेज में बनी सहमति को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कूटनीतिक संबंध और वैश्विक मुद्दे
रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया कि यूक्रेन के अलावा दोनों वरिष्ठ नेताओं ने कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की। इनमें रूस और अमेरिका के राजनयिक मिशनों के कामकाज को सामान्य बनाने का मुद्दा भी शामिल था। इसके साथ ही, पश्चिम एशिया की स्थिति सहित विभिन्न क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों पक्षों ने अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, इस बात पर सहमति बनी कि दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच संपर्क जारी रहेगा।
'एंकोरेज समझौते' पर क्या है विवाद?
यह बैठक उस पृष्ठभूमि में हुई है, जब 'एंकोरेज समझौते' को लेकर दोनों देशों के बीच अलग-अलग बयान सामने आए थे। दरअसल, अगस्त 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अलास्का के एंकोरेज में मिले थे। उस बैठक के बाद मार्को रूबियो ने कहा था कि वहां कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ था, सिर्फ प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी।
लावरोव ने रूबियो के इस बयान पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि एंकोरेज बैठक में ट्रंप, पुतिन, रूबियो और वे स्वयं मौजूद थे, जहाँ राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ से एक-एक कर अमेरिकी प्रस्तावों की पुष्टि की थी। लावरोव के अनुसार, पुतिन के हर बिंदु के बाद विटकॉफ ने 'हाँ' कहकर सहमति जताई थी। रूसी विदेश मंत्री ने कहा, "अगर एक पक्ष समाधान के लिए प्रस्ताव रखता है और दूसरा पक्ष उन पर सहमति जताता है, तो इसे केवल प्रस्ताव कहना सही नहीं लगता।"
इनपुट: IANS



