बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाज़ार: क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर करने वालों पर सेबी की नज़र, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

शेयर बाज़ार में हाल ही में लागू हुए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) सिस्टम के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने वालों को नियामक सेबी (SEBI) ने कड़ी चेतावनी दी है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने…

शेयर बाज़ार: क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर करने वालों पर सेबी की नज़र, कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
(फोटो: IANS)

शेयर बाज़ार में हाल ही में लागू हुए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' (CAS) सिस्टम के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ करने वालों को नियामक सेबी (SEBI) ने कड़ी चेतावनी दी है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई भी इस नई व्यवस्था में गड़बड़ी करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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मुंबई में फिक्की कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत में, समाचार एजेंसी IANS के हवाले से पांडे ने कहा, "हम एक बात साफ करना चाहते हैं कि अगर लोग सीएएस में हेरफेर करते हैं, तो हम उनके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई करेंगे।" उन्होंने बाज़ार के प्रतिभागियों को आगाह किया कि वे सिस्टम का दुरुपयोग करने या उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश न करें।

क्यों लाया गया नया सिस्टम?

सेबी चेयरमैन के मुताबिक, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) को लागू करने का मुख्य उद्देश्य शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और इसे ज़्यादा निष्पक्ष बनाना था। यह सिस्टम पुराने वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) आधारित तरीके की जगह लाया गया है, जिसमें रेगुलर बाज़ार के आखिरी 30 मिनट के ट्रेड की औसत कीमत पर क्लोजिंग प्राइस तय होता था।

तुहिन कांत पांडे ने ज़ोर देकर कहा कि नए सिस्टम में हेरफेर को पकड़ने की क्षमता पहले से कहीं ज़्यादा है। उन्होंने कहा, "सीएएस सिस्टम में हमारे पास हेरफेर पकड़ने की अधिक क्षमता है। पुराने वीडब्ल्यूएपी सिस्टम की तुलना में, सीएएस सिस्टम में हम हेरफेर को अपेक्षाकृत आसानी से पकड़ सकते हैं।"

कैसे काम करता है क्लोजिंग ऑक्शन सेशन?

इस महीने की शुरुआत में पेश किया गया यह सिस्टम बाज़ार बंद होने के बाद 20 मिनट का एक अलग सेशन होता है। इस दौरान, एक्सचेंज शेयरों की खरीद और बिक्री के ऑर्डर जमा करता है। इसके बाद, स्टॉक की क्लोजिंग कीमत उस स्तर पर तय की जाती है, जहाँ सबसे ज़्यादा वॉल्यूम में शेयरों का कारोबार संभव हो सके। इसका लक्ष्य क्लोजिंग प्राइस की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और बड़े ऑर्डरों के लिए बेहतर एग्जीक्यूशन सुनिश्चित करना है।

इनपुट: IANS

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