मंगलवार, 29 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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करूर भगदड़ मामला: DMK की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट करूर भगदड़ मामले में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) द्वारा दायर एक नई याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस याचिका में मामले की जांच को प्रभावि

करूर भगदड़ मामला: DMK की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को करेगा सुनवाई
(फोटो: IANS)

सुप्रीम कोर्ट करूर भगदड़ मामले में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) द्वारा दायर एक नई याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस याचिका में मामले की जांच को प्रभावित करने के प्रयासों का आरोप लगाते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया।

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यह मामला 27 सितंबर, 2025 को हुई उस दुखद घटना से जुड़ा है, जब टीवीके की एक रैली के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की जान चली गई थी और 142 अन्य घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप चुका है और इसकी निगरानी के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की गई है।

याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?

DMK के संगठन सचिव आरएस भारती द्वारा दायर इस अर्जी में तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंत्री के हालिया सार्वजनिक बयान और पीड़ितों के परिवारों को सरकारी लाभ देने के प्रस्ताव कोर्ट की निगरानी में चल रही सीबीआई जांच को प्रभावित कर सकते हैं।

याचिका में आधव अर्जुन के 2 जुलाई के एक भाषण का हवाला देते हुए कहा गया कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से "हिसाब बराबर करने" की बात कही और त्रासदी के लिए पिछली DMK सरकार को जिम्मेदार ठहराया। DMK का तर्क है कि जब मामला कोर्ट की निगरानी में हो, तो कैबिनेट मंत्री का ऐसा बयान जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है और जनता में एक खास धारणा बनाने का प्रयास है।

गवाहों को प्रभावित करने की आशंका

याचिका में उन रिपोर्टों का भी उल्लेख है, जिनमें मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करूर जाकर पीड़ित परिवारों को सरकारी लाभ देने की बात कही गई है। DMK ने स्पष्ट किया है कि उसे कल्याणकारी उपायों पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चूंकि ये परिवार सीबीआई जांच में महत्वपूर्ण गवाह हैं, इसलिए मामले से जुड़े लोगों का उनसे सीधा संपर्क जांच की स्वतंत्रता को लेकर चिंता पैदा करता है।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक टीवीके मंत्रियों को करूर भगदड़ से जुड़े सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए।

इनपुट: IANS

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