बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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संचार साथी पोर्टल का नया रिकॉर्ड: सिर्फ एक महीने में 77,000 से ज्यादा खोए हुए मोबाइल फोन बरामद

भारत सरकार के 'संचार साथी' पोर्टल ने खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ढूंढ निकालने में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले जुलाई 2026 में इस पहल के माध्यम से…

संचार साथी पोर्टल का नया रिकॉर्ड: सिर्फ एक महीने में 77,000 से ज्यादा खोए हुए मोबाइल फोन बरामद
(फोटो: IANS)

भारत सरकार के 'संचार साथी' पोर्टल ने खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ढूंढ निकालने में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले जुलाई 2026 में इस पहल के माध्यम से 77,692 मोबाइल हैंडसेट उनके असली मालिकों तक पहुँचाए गए हैं। संचार मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर बताया कि यह पहली बार है जब एक महीने में बरामद किए गए फोनों की संख्या 75,000 के पार पहुँची है।

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इस उपलब्धि पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि यह "संचार साथी मंच के प्रति बढ़ते जनविश्वास और दूरसंचार विभाग, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं तथा विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस के बीच मजबूत समन्वय का परिणाम है।"

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

जब कोई नागरिक अपने खोए या चोरी हुए फोन की जानकारी संचार साथी पोर्टल या मोबाइल ऐप पर दर्ज कराता है, तो उस डिवाइस को भारतीय दूरसंचार नेटवर्क पर ब्लॉक कर दिया जाता है। इससे फोन का गलत इस्तेमाल रुक जाता है। अगर कोई व्यक्ति उस ब्लॉक किए गए फोन में नया सिम कार्ड डालकर इस्तेमाल करने की कोशिश करता है, तो नेटवर्क तुरंत उसकी पहचान कर लेता है। इसके बाद, असली मालिक और संबंधित पुलिस स्टेशन को अलर्ट भेज दिया जाता है, जिससे फोन को ट्रैक कर उसे बरामद करने की प्रक्रिया तेज हो जाती है।

लगातार बढ़ रही है सफलता दर

आँकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच हर महीने फोन बरामदगी की दर में 201 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इस सफलता के पीछे दूरसंचार विभाग (डीओटी) की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों की अहम भूमिका है, जो स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम करते हैं।

उपयोगकर्ताओं के लिए नई सुविधाएँ

सरकार ने इस सिस्टम को और भी पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए कई सुधार किए हैं। अब नागरिकों को मोबाइल ट्रेसिंग रिपोर्ट के साथ संबंधित पुलिस स्टेशन की जानकारी भी SMS, ईमेल और पोर्टल पर दी जाती है। कई मामलों में जाँच एजेंसियों को वैकल्पिक मोबाइल नंबरों की जानकारी भी मुहैया कराई जाती है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि फोन वापस मिलने के बाद उपयोगकर्ताओं को उसे 'फैक्ट्री रीसेट' करने की सलाह दी जाती है, ताकि किसी भी संभावित मैलवेयर या अनधिकृत सॉफ्टवेयर से बचा जा सके।

इनपुट: IANS

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