केरल: RTO में 'एजेंट राज' से परेशान ऑटो चालक ने दी जान, भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार ने दिए जांच के आदेश
केरल के मलप्पुरम में एक 35 वर्षीय ऑटो रिक्शा चालक की आत्महत्या ने राज्य के मोटर वाहन विभाग (MVD) में कथित तौर पर गहरे तक पैठ बना चुके 'एजेंट राज' को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है। मृतक ने…
केरल के मलप्पुरम में एक 35 वर्षीय ऑटो रिक्शा चालक की आत्महत्या ने राज्य के मोटर वाहन विभाग (MVD) में कथित तौर पर गहरे तक पैठ बना चुके 'एजेंट राज' को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है। मृतक ने अपने आखिरी सोशल मीडिया पोस्ट में अधिकारियों पर उत्पीड़न और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने मामले की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, किझिस्सेरी निवासी शौकत गुरुवार को अपने घर में मृत पाए गए। अपनी मृत्यु से पहले उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि कोंडोट्टी उप-आरटीओ कार्यालय में उन्हें अपने ऑटो रिक्शा का फिटनेस प्रमाण पत्र देने से सिर्फ इसलिए इनकार किया जा रहा था क्योंकि उन्होंने किसी एजेंट के माध्यम से संपर्क नहीं किया था।
गहराई तक फैला भ्रष्टाचार का आरोप
शौकत ने दावा किया कि वह पिछले 10 महीनों से अपने ऑटो के फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए चक्कर काट रहे थे, जिस वजह से वह अपनी आजीविका का एकमात्र साधन नहीं चला पा रहे थे। उन्होंने MVD के भीतर फैले भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत एजेंट प्रणाली को बताया। उनका आरोप था कि अगर इस व्यवस्था को खत्म कर दिया जाए तो अधिकांश भ्रष्टाचार स्वतः समाप्त हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंट ही विभिन्न सेवाओं के लिए शुल्क तय करते हैं और अधिकारी इस लेन-देन में उनकी मदद करते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और जांच
इस दुखद घटना के सामने आने के बाद सरकार हरकत में आ गई है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शौकत के परिवार से बात कर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। परिवहन मंत्री सीपी जॉन ने परिवहन आयुक्त नागराजू चकिलम से रिपोर्ट तलब की है। वहीं, परिवहन सचिव टीवी अनुपमा को दो दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए एलडीएफ के एक दशक के शासन में भी इस एजेंट संस्कृति को खत्म नहीं किया जा सका था। केरल के परिवहन कार्यालयों में फिटनेस प्रमाणन से लेकर स्वामित्व हस्तांतरण जैसी सेवाओं के लिए बिचौलियों पर निर्भरता एक खुला रहस्य रहा है, जिससे जवाबदेही पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री सतीशन की सरकार उस व्यवस्था को खत्म कर पाएगी, जिसे पिछली सरकारें समाप्त करने में विफल रही हैं। शौकत की मौत की जांच से शायद कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई हो जाए, लेकिन यह त्रासदी केरल के आरटीओ सिस्टम में एक और दुखद अध्याय बनकर न रह जाए, इसके लिए उस गहरी एजेंट-अधिकारी सांठगांठ को तोड़ना होगा, जिसका आरोप शौकत ने लगाया था।
इनपुट: IANS



