कर्नाटक: प्रियांक खड़गे की रजिस्ट्रेशन मांग के बीच बेलगावी में होगी RSS की अहम राष्ट्रीय बैठक
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे द्वारा संगठन के पंजीकरण का मुद्दा उठाए जाने के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राज्य में अपनी एक महत्वपूर्ण वार्षिक बैठक करने जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रि
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे द्वारा संगठन के पंजीकरण का मुद्दा उठाए जाने के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) राज्य में अपनी एक महत्वपूर्ण वार्षिक बैठक करने जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह तीन दिवसीय 'प्रांत प्रचारक बैठक' 10 से 12 जुलाई तक बेलगावी में आयोजित होगी, जिसमें संघ के शीर्ष नेतृत्व सहित देशभर के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल होंगे।
इस बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले भी मौजूद रहेंगे। उनके अलावा सभी प्रांत प्रचारक और विभिन्न सहयोगी संगठनों के संगठनात्मक सचिव भी इस महत्वपूर्ण आयोजन का हिस्सा बनेंगे।
बैठक का एजेंडा और महत्व
सूत्रों के अनुसार, प्रांत प्रचारक बैठक को RSS की प्रमुख आंतरिक संगठनात्मक बैठकों में गिना जाता है। यह वरिष्ठ पदाधिकारियों के लिए एक ऐसा मंच है जहाँ वे संगठन की प्रगति का आकलन करते हैं, देशभर से मिले फीडबैक पर चर्चा करते हैं और भविष्य की गतिविधियों के लिए एक रोडमैप तैयार करते हैं।
इस तीन दिवसीय चर्चा के दौरान पिछले वर्ष की संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही, आने वाले महीनों के कार्यक्रमों और विस्तार योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। बैठक में संगठनात्मक तालमेल मजबूत करने, चल रही गतिविधियों के कार्यान्वयन की समीक्षा करने और संघ व उसके सहयोगी संगठनों के लिए प्राथमिकताएं तय करने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में संगठनात्मक विकास पर रिपोर्ट भी पेश करेंगे।
पंजीकरण को लेकर क्या है विवाद?
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे लगातार संघ से पंजीकरण के दस्तावेज मांग रहे हैं। जून में उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखकर संगठन को औपचारिक रूप से पंजीकृत कराने का आग्रह किया था। खड़गे ने RSS की कानूनी स्थिति, फंडिंग, वित्त, पदाधिकारियों, संपत्ति और टैक्स अनुपालन के बारे में सार्वजनिक रूप से जानकारी देने की मांग की थी।
खड़गे का तर्क है कि RSS जैसे बड़े और प्रभावशाली संगठन को कानून के तहत अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि गृह विभाग संघ के कार्यक्रमों और नेताओं को सुरक्षा देता है, इसलिए सरकार को यह जानने का अधिकार है कि वह किसे सुरक्षा दे रही है। हालांकि, उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया था कि वह संघ पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इस मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया था और कहा था कि छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।
इनपुट: IANS



