जहाज निर्माण में भारत बनेगा ग्लोबल हब? सरकार ने 69,725 करोड़ रुपये के भारी-भरकम पैकेज को दी मंज़ूरी
भारत के जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। सरकार ने इस सेक्टर को नई गति देने के लिए लगभग 69,725 करोड़ रुपये के एक व्यापक…
भारत के जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल की है। सरकार ने इस सेक्टर को नई गति देने के लिए लगभग 69,725 करोड़ रुपये के एक व्यापक पैकेज को मंजूरी दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कदम का लक्ष्य देश में जहाज बनाने की क्षमता को बढ़ाना, इस क्षेत्र के लिए लंबी अवधि के वित्तपोषण (फाइनेंसिंग) का रास्ता खोलना और कुशल कामगार तैयार करना है।
यह पूरी कवायद 'मैरीटाइम इंडिया विजन 2030' और 'मैरीटाइम अमृतकाल विजन 2047' के लक्ष्यों का हिस्सा है, जिसके तहत भारत को जहाज निर्माण के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने का सपना देखा गया है। लोकसभा में पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस पैकेज से जुड़ी अहम जानकारियाँ साझा कीं।
पैकेज के प्रमुख हिस्से और लक्ष्य
इस विशाल पैकेज को कई योजनाओं में बांटा गया है, ताकि उद्योग की अलग-अलग ज़रूरतों को पूरा किया जा सके। इसमें 25,000 करोड़ रुपये का एक मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड बनाया गया है, जो जहाज निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स को लंबे समय के लिए वित्तीय सहायता देगा। इस फंड में 20,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड और 5,000 करोड़ रुपये का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड (ब्याज प्रोत्साहन कोष) शामिल है।
इसके अलावा, सरकार ने 19,989 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SBDS) को भी मंजूरी दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश की जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाकर सालाना 45 लाख ग्रॉस टनेज तक पहुंचाना है। यह लक्ष्य नए ग्रीनफील्ड क्लस्टर (नए औद्योगिक क्षेत्र) बनाकर और मौजूदा इकाइयों का विस्तार करके हासिल किया जाएगा।
लागत कम करने और मांग बढ़ाने पर ज़ोर
भारतीय शिपयार्ड की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक वैश्विक स्तर पर लागत को लेकर प्रतिस्पर्धा है। इसे संबोधित करने के लिए, पैकेज में 24,736 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम भी शामिल है। इसका मकसद भारतीय शिपयार्ड को वित्तीय सहायता देकर उनकी लागत को वैश्विक शिपयार्ड के बराबर लाना है।
मांग सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक एकीकृत रणनीति अपनाई है, जिसके तहत 400 से ज़्यादा जहाजों के अधिग्रहण की योजना है। इससे भारतीय शिपयार्ड को लंबे समय तक ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। सरकार ने आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में तीन नए शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने को भी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। साथ ही, 19 सितंबर 2025 को 10,000 ग्रॉस टनेज (GT) या उससे अधिक क्षमता वाले भारतीय ध्वज वाले जहाजों को 'इन्फ्रास्ट्रक्चर' का दर्जा दिया गया था, जो इस उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार है।
इनपुट: IANS



