अजित पवार प्लेन क्रैश: रोहित पवार का सरकार पर जांच दबाने का आरोप, अगले हफ्ते सबूत पेश करने का दावा
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में मौत के सात महीने बाद, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार पर जांच को जानबूझकर दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने अगले…
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में मौत के सात महीने बाद, एनसीपी (एसपी) विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार पर जांच को जानबूझकर दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने अगले हफ्ते सबूतों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में जिम्मेदार लोगों को बेनकाब करने का ऐलान किया है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कर्जत-जामखेड़ से विधायक रोहित पवार ने शुक्रवार को सोशल मीडिया के जरिए जांच की धीमी गति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अजित पवार के निधन को सात महीने बीत चुके हैं, लेकिन राज्य सीआईडी की जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने इस बात पर भी निराशा जताई कि मामला अब तक सीबीआई को नहीं सौंपा गया है।
जांच में देरी और FIR पर सवाल
रोहित पवार ने प्रक्रियात्मक और कानूनी देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "एक सामान्य एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है, और कर्नाटक में दर्ज एफआईआर को भी महाराष्ट्र सरकार ने ट्रांसफर नहीं किया है।" गौरतलब है कि 28 जनवरी 2026 को बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान वीएसआर एविएशन का विमान क्रैश हो गया था, जिसमें अजित पवार की मौत हो गई थी।
विमान कंपनी पर उठे गंभीर प्रश्न
रोहित पवार ने विशेष रूप से विमान कंपनी वीएसआर एविएशन को बचाने की कोशिशों पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा, "वीएसआर एविएशन को बचाने के लिए इतनी बेताब कोशिशें कौन कर रहा है और क्यों? मैं 4 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूतों के साथ सब कुछ उजागर करूंगा।"
यह पहली बार नहीं है जब रोहित पवार ने वीएसआर एविएशन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पहले भी बताया था कि इस साल की पहली तिमाही में कंपनी को राज्य सरकार से मिलने वाले भुगतान में अचानक भारी वृद्धि हुई थी। उनके दावों के मुताबिक, जनवरी से मार्च के बीच कंपनी को कुल 145 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया, जबकि ऐसी सेवाओं का औसत मासिक बिल करीब 10 करोड़ रुपए होता है।
उन्होंने भुगतान के समय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि हादसे से एक दिन पहले 15.72 करोड़, हादसे वाले दिन 9.81 करोड़ और अगले दिन 16.86 करोड़ रुपए जारी किए गए। इन आरोपों और उच्च-स्तरीय जांच की मांग के बीच, अब सभी की निगाहें 4 सितंबर को होने वाली रोहित पवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं।
इनपुट: IANS



