गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर केस: विसरा सैंपल बदलने का दावा, परिवार ने कोर्ट में दिया सनसनीखेज पत्र

कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज डॉक्टर रेप और हत्या मामले में एक सनसनीखेज मोड़ आ गया है। मृतका के परिवार ने सियालदह कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि उन्हें एक गुमनाम पत्र मिला है, जिसमे

कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर केस: विसरा सैंपल बदलने का दावा, परिवार ने कोर्ट में दिया सनसनीखेज पत्र
(फोटो: IANS)

कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज डॉक्टर रेप और हत्या मामले में एक सनसनीखेज मोड़ आ गया है। मृतका के परिवार ने सियालदह कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि उन्हें एक गुमनाम पत्र मिला है, जिसमें उनकी बेटी के विसरा सैंपल (आंतरिक अंगों के नमूने) से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने अदालत से इस पत्र की प्रामाणिकता की जांच कराने और आरोपों पर कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।

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यह मामला पिछले साल 9 अगस्त 2024 का है, जब आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से महिला डॉक्टर का शव मिला था। अगले ही दिन कोलकाता पुलिस ने संजय रॉय नामक एक सिविक वॉलंटियर को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

गुमनाम पत्र में क्या हैं आरोप?

पीड़िता के परिवार को मिले इस पत्र में दावा किया गया है कि विसरा सैंपल को कोलकाता के बेलगछिया स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) में बदला गया था। पत्र के मुताबिक, सैंपल को सीबीआई और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) भेजने से पहले ही राज्य की लैब में कथित तौर पर बदल दिया गया।

पत्र लिखने वाले ने खुद को राज्य फोरेंसिक लैब का एक पूर्व कर्मचारी बताया है और इस कथित साजिश में लैब के तीन अधिकारियों के शामिल होने का आरोप लगाया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि यह सब तत्कालीन मुख्यमंत्री या तृणमूल कांग्रेस के निर्देश पर किया गया था। हालांकि, परिवार ने पत्र भेजने वाले या आरोपी अधिकारियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

परिवार ने सीबीआई पर उठाए सवाल

पीड़िता के पिता ने बताया कि उन्हें एक ही जैसा पत्र दो बार मिला – पहला 16 मई को और दूसरा 23 मई को। उन्होंने कहा, "हमें मई में एक पत्र मिला था। हमने तुरंत इसकी जानकारी सीबीआई को दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सात दिन बाद वही पत्र फिर आया। उसमें लिखा है कि विसरा रिपोर्ट में हेरफेर किया गया है। किसने किया और किसके आदेश पर किया, सब कुछ उसमें लिखा है। अब हमने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।"

परिवार को उम्मीद है कि अब अदालत के हस्तक्षेप के बाद सीबीआई इस मामले में आवश्यक कदम उठाएगी। पिता ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि राज्य में सरकार बदलने के बावजूद स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम अपने पद पर कैसे बने हुए हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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