रविवार, 12 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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राजस्थान: पंचायत और निकाय चुनावों में OBC आरक्षण के लिए राज्यव्यापी डिजिटल सर्वे शुरू

राजस्थान में लंबे समय से अटके पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का रास्ता साफ करने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सीटों का आरक्षण तय करने के उद्देश्य से शुक्रव

राजस्थान: पंचायत और निकाय चुनावों में OBC आरक्षण के लिए राज्यव्यापी डिजिटल सर्वे शुरू
(फोटो: IANS)

राजस्थान में लंबे समय से अटके पंचायत और शहरी निकाय चुनावों का रास्ता साफ करने के लिए एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सीटों का आरक्षण तय करने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक व्यापक डिजिटल सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस सर्वे का मकसद स्थानीय निकायों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर प्रामाणिक और अद्यतन आंकड़े जुटाना है, ताकि आरक्षण की प्रक्रिया कानूनी रूप से खरी उतर सके।

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यह सर्वेक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने 31 जुलाई तक चुनाव कराने के अदालती निर्देश का पालन न होने पर राजस्थान उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की थी। दरअसल, संवैधानिक प्रावधानों के तहत ओबीसी, एससी, एसटी और महिलाओं के लिए आरक्षण तय करने के लिए विश्वसनीय आंकड़ों की कमी के कारण ही चुनाव प्रक्रिया में देरी हो रही है।

मोबाइल ऐप से हो रहा सर्वे

राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की देखरेख में यह सर्वे 23 जुलाई तक चलेगा। इसके लिए 'राजधारा सर्वे मोबाइल ऐप' का इस्तेमाल किया जा रहा है। आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन ने बताया कि इसका मुख्य लक्ष्य स्थानीय निकायों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सटीक डेटा इकट्ठा करना है। इस अभियान में कुल 51,168 सरकारी गणनाकर्ता घर-घर जाकर ओबीसी परिवारों की सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज करेंगे।

पारदर्शिता और निगरानी

पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग राज्य स्तर पर ऑनलाइन निगरानी कर रहा है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस काम के लिए 7 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 82 जिला स्तरीय नोडल अधिकारियों, 765 ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और 1,428 मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया गया था। हर जिले में एक अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) को मुख्य समन्वयक बनाया गया है, जो तकनीकी सहायता और अन्य समस्याओं का समाधान करेंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 23 जुलाई की समय सीमा बढ़ने की संभावना बहुत कम है, इसलिए सभी ओबीसी परिवारों से सटीक जानकारी देने की अपील की गई है।

सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनावों के लिए आरक्षण का नया रोस्टर तैयार किया जाएगा, जो राज्य में चुनाव कराने की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।

इनपुट: IANS

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