राजस्थान: निकाय चुनाव से पहले देर रात खुली अदालत, हाईकोर्ट ने 10 पार्षदों की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
राजस्थान में निकाय चुनावों के लिए जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच रविवार देर रात एक असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक विशेष सुनवाई करते हुए हनुमानगढ़ और बीकानेर के 10 पार्षदों को…
राजस्थान में निकाय चुनावों के लिए जारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच रविवार देर रात एक असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक विशेष सुनवाई करते हुए हनुमानगढ़ और बीकानेर के 10 पार्षदों को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह विशेष बेंच तब गठित की गई जब कई पार्षदों ने आशंका जताई कि पुराने मामलों में उन्हें गिरफ्तार कर चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने से रोका जा सकता है।
यह पूरी कार्रवाई रविवार रात 10 बजे से लेकर सोमवार तड़के तक चली। मुख्य न्यायाधीश डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देश पर याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई के लिए विशेष बेंचों का गठन किया गया था। इन याचिकाओं में कहा गया था कि पुलिस की कार्रवाई का समय राजनीतिक रूप से प्रेरित है, ताकि वे मेयर और चेयरपर्सन पद के लिए होने वाले मतदान में हिस्सा न ले सकें।
अलग-अलग बेंचों में देर रात सुनवाई
हनुमानगढ़ से जुड़े मामले की सुनवाई जस्टिस नूपुर भाटी की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच ने की। इस बेंच ने हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। वहीं, बीकानेर मामले में जस्टिस सुनील बेनीवाल की बेंच ने सुनवाई की और रात करीब 11:15 बजे कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद को राहत दी। अहमद के वकील डॉ. सचिन आचार्य ने अदालत को बताया कि पुलिस पार्षद को एक पुराने मामले में बुला रही थी, ताकि वे सोमवार को होने वाले चेयरपर्सन पद के मतदान में भाग न ले पाएं।
चुनावों से ठीक पहले की कार्रवाई
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर पदों के लिए 25 सितंबर को चुनाव होने हैं, और कई अन्य नगर निकायों में भी चेयरपर्सन चुने जा रहे हैं। इसी तरह के अन्य मामलों में, अदालत ने रविवार को नागौर के पार्षद तेजपाल मिर्धा और श्रीविजयनगर के सुशील मीढ़ा की गिरफ्तारी पर भी अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
हनुमानगढ़ के राजनीतिक समीकरण की बात करें तो वहां निकाय में कुल 60 सीटें हैं, जिनमें से 15 पर भाजपा को जीत मिली थी, जबकि निर्दलीय विधायक गणेश बंसल के खेमे के करीब 32 पार्षदों ने जीत हासिल की है। हाल ही में, बंसल को भी बीकानेर में 23 साल पुराने एक जमीन के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस देर रात की अदालती कार्रवाई ने राज्य के निकाय चुनावों में एक नया कानूनी मोड़ ला दिया है।
इनपुट: IANS



