राजस्थान: भ्रष्टाचार और लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई, 33 वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर गिराई गाज
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार और कर्तव्य में लापरवाही के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाते हुए 33 वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की एक…
राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने भ्रष्टाचार और कर्तव्य में लापरवाही के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाते हुए 33 वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन अधिकारियों पर अवैध रेत खनन माफिया से मिलीभगत, वित्तीय अनियमितताओं और अपने काम में गंभीर लापरवाही जैसे आरोप साबित हुए हैं।
इस कार्रवाई के तहत, सरकार ने 17 सेवारत अधिकारियों के वेतन वृद्धि (Salary Increment) पर रोक लगा दी है, जबकि 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन या तो रोक दी गई है या उसमें कटौती की गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे भ्रष्टाचार के प्रति अपनी 'जीरो-टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बताते हुए सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया है।
किस पर, क्यों हुई कार्रवाई?
पुलिस विभाग: पुलिस विभाग में कई अधिकारियों को अपराधियों और अवैध खनन करने वालों से मिलीभगत और जांच में लापरवाही बरतने का दोषी पाया गया। एक मामले में, एक तत्कालीन सर्किल ऑफिसर (CO) को अवैध रेत खनन में शामिल लोगों से सांठगांठ करने और अनुचित लाभ लेने के आरोप में चार वार्षिक वेतन वृद्धियों से वंचित कर दिया गया है। वहीं, एक अन्य आपराधिक मामले में ठीक से जांच न करने पर एक सर्किल इंस्पेक्टर (CI), एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और एक कांस्टेबल के खिलाफ भी वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई है।
प्रशासनिक और अन्य सेवाएं: राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के एक अधिकारी को मनरेगा योजना के कामों के निरीक्षण में बड़ी लापरवाही बरतने के लिए दंडित किया गया है। इसके अलावा, बिना अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के आरोप में तीन चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है। एक अन्य गंभीर मामले में, गलत तरीके से खून चढ़ाने के एक प्रकरण में एक डॉक्टर की दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी गई है। बागवानी, सचिवालय सेवा और लेखा सेवा के अधिकारी भी कार्रवाई की जद में आए हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं मिली राहत
सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सेवानिवृत्ति का मतलब यह नहीं है कि अधिकारी अपनी सेवा के दौरान की गई गंभीर गलतियों की जवाबदेही से बच सकते हैं। इसी के तहत 16 रिटायर्ड अधिकारियों को वित्तीय गड़बड़ियों और नियमों के उल्लंघन के लिए पेंशन संबंधी दंड दिया गया है।
एक गंभीर मामले में, राजस्थान लेखा सेवा के एक सेवानिवृत्त अधिकारी द्वारा एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने की बात सामने आई, जिससे राजकोष को भारी नुकसान हुआ। सरकार ने उनकी 100% पेंशन स्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया है। इसी तरह, RAS के दो अन्य सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा आवासीय और व्यावसायिक भूखंडों को गलत तरीके से कृषि भूमि बताकर सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के लिए उनकी पेंशन का 20 प्रतिशत हिस्सा पांच साल के लिए रोक दिया गया है।
सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि सभी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से और तय नियमों के अनुसार की गई है। राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत, आठ मामलों में अधिकारियों को राहत भी मिली, क्योंकि विस्तृत जांच में उनके खिलाफ लगे आरोप साबित नहीं हो सके।
इनपुट: IANS



