शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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राजस्थान: IAS अधिकारी पर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप, ACB करेगी विस्तृत जांच

राजस्थान के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल अपने पद का दुरुपयोग कर एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों के घेरे में हैं। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को इन गंभीर आरोपों…

राजस्थान: IAS अधिकारी पर निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप, ACB करेगी विस्तृत जांच
(फोटो: IANS)

राजस्थान के एक वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल अपने पद का दुरुपयोग कर एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों के घेरे में हैं। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को इन गंभीर आरोपों की विस्तृत जांच करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस जांच की स्वीकृति भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17-ए के तहत प्रदान की गई है।

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मामला एक निजी कंपनी, गोयल फैशन प्राइवेट लिमिटेड, जो 'अनंता' ब्रांड नाम से होटल और रिसॉर्ट चलाती है, को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने से जुड़ा है। आरोपों के मुताबिक, अग्रवाल ने कंपनी के निदेशकों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा।

क्या हैं मुख्य आरोप?

ACB की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, शिखर अग्रवाल ने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया। इनमें उदयपुर के जिला कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष और उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे पद शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण के नियमों में छूट दिलवाई, जरूरी प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बिना ही मंजूरी दे दी और एक विशेष रियायती वित्तीय पैकेज भी दिलाया।

पारिवारिक संपत्ति भी जांच के दायरे में

जांच का एक अहम हिस्सा अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा 'अनंता' रिसॉर्ट्स में खरीदी गई संपत्तियां हैं। ACB ने पाया कि उदयपुर के बुझड़ा स्थित रिसॉर्ट में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10 विला (15 लाख रुपए प्रति विला) खरीदे गए। इसी तरह, अलवर जिले के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में भी उनके और उनकी पत्नी के नाम पर 8 विला (16.5 लाख रुपए प्रति विला) खरीदे गए।

इसके अलावा, उनके दो बेटों के नाम पर 4 विला (लगभग 15 लाख रुपए प्रति विला) और उनके सास-ससुर के नाम पर 4 अन्य विला (लगभग 16.5 लाख रुपए प्रति विला) की खरीद भी जांच के दायरे में है। ACB को संदेह है कि ये सभी संपत्तियां बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर हासिल की गईं।

लेन-देन का चौंकाने वाला समय

ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि उद्योग विभाग से मिली रिपोर्ट और गोपनीय सूत्रों की जानकारी के बाद औपचारिक जांच की जरूरत महसूस हुई। एक चौंकाने वाली जानकारी यह भी सामने आई है कि अग्रवाल के नाम पर 20 विला का पंजीकरण 27 मार्च, 2026 को हुआ था। कथित तौर पर ठीक उसी दिन, वित्त विभाग ने गोयल फैशन प्राइवेट लिमिटेड को एक विशेष रियायती वित्तीय पैकेज जारी किया था। इन्हीं परिस्थितियों के मद्देनजर अब ACB पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजस्थान डेस्क

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