मंगलवार, 22 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

टाटा संस में नेतृत्व पर विवाद: शरद पवार ने ट्रस्टों की भूमिका कमजोर होने पर जताई चिंता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने टाटा संस में नेतृत्व संरचना को लेकर हाल में हुए बदलावों पर अपनी चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पवार ने…

टाटा संस में नेतृत्व पर विवाद: शरद पवार ने ट्रस्टों की भूमिका कमजोर होने पर जताई चिंता
(फोटो: IANS)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने टाटा संस में नेतृत्व संरचना को लेकर हाल में हुए बदलावों पर अपनी चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पवार ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि टाटा समूह की परोपकारी पहचान और संस्थागत मूल्यों को बनाए रखना देश के सामाजिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विज्ञापन

पवार ने जमशेदजी टाटा द्वारा स्थापित और सर दोराबजी टाटा व सर रतन टाटा द्वारा आगे बढ़ाए गए समूह के मूल सिद्धांतों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समूह का मुख्य दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करना था कि कारोबार से होने वाली कमाई का उपयोग समाज के कल्याण के लिए किया जाए। इसी व्यवस्था के तहत, टाटा संस का अधिकांश स्वामित्व जानबूझकर चैरिटेबल ट्रस्टों को दिया गया, न कि किसी एक व्यक्ति को।

ट्रस्टों का स्वामित्व और सामाजिक प्रभाव

वर्तमान में, सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत इक्विटी है। पवार ने बताया कि इस हिस्सेदारी से मिलने वाला लाभांश सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के वित्तपोषण में जाता है।

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि महाराष्ट्र इस विरासत का केंद्र है, जहाँ ट्रस्टों ने राष्ट्रीय महत्व के कई संस्थान स्थापित किए हैं। इनमें टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) और नेशनल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स (NCPA) शामिल हैं। पवार ने चेतावनी दी कि यदि ट्रस्टों की भूमिका कमजोर होती है, तो इन संस्थानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

नेतृत्व पर हालिया विवाद

पवार ने 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक का भी उल्लेख किया। उस बैठक में कार्यकारी चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल पांच साल बढ़ाने और कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की दिशा में उठाए गए कदमों पर 4-1 के विवादित वोट से फैसला हुआ था। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इन दोनों प्रस्तावों के खिलाफ मतदान किया था, जबकि नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने पक्ष में वोट दिया।

शरद पवार के अनुसार, कंपनी के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के तहत, नेतृत्व से जुड़े अहम फैसलों के लिए बहुसंख्यक हिस्सेदारी वाले ट्रस्टों का प्रतिनिधित्व करने वाले दोनों नॉमिनी डायरेक्टर की सहमति अनिवार्य है। इस आधार पर, उन्होंने कहा कि 4-1 से पारित प्रस्ताव कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

संस्थागत विरासत के सम्मान की अपील

पवार ने जोर देकर कहा कि टाटा ट्रस्ट के नॉमिनी डायरेक्टर को मिले वीटो और मंजूरी के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए, जिसे सुप्रीम कोर्ट भी मान्यता दे चुका है। उन्होंने सुझाव दिया कि नेतृत्व से जुड़े विवादों को टकराव के बजाय रचनात्मक बातचीत और कानूनी कॉर्पोरेट प्रक्रियाओं से सुलझाया जाना चाहिए।

अंत में, उन्होंने सभी हितधारकों से इस संस्थागत विरासत का सम्मान करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत के राष्ट्रीय विकास के लिए प्रतिबद्ध इस समूह की सुरक्षा करना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

इनपुट: IANS

N

News4Social राजनीति डेस्क

News4Social राजनीति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राजनीति और चुनाव से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →