ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम, इंडोनेशिया को ब्रह्मोस: PM मोदी के दौरे में भारत के लिए कैसे खुले दशकों से बंद दरवाजे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जकार्ता, मेलबर्न और ऑकलैंड यात्राओं ने भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक तौर पर कई नए रास्ते खोले हैं, जो दशकों से बंद पड़े थे। इन यात्राओं के परिणामस्वरूप भारत को जहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया जकार्ता, मेलबर्न और ऑकलैंड यात्राओं ने भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक तौर पर कई नए रास्ते खोले हैं, जो दशकों से बंद पड़े थे। इन यात्राओं के परिणामस्वरूप भारत को जहाँ एक ओर ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की आपूर्ति का रास्ता साफ हुआ, वहीं दूसरी ओर इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल जैसा बड़ा रक्षा सौदा भी हुआ। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव दुनिया के भारत को देखने के नजरिए में आए परिवर्तन को दर्शाता है।
ऑस्ट्रेलिया: यूरेनियम पर बदला दशकों पुराना रुख
एक समय था जब ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम देने से साफ इनकार कर दिया था। जनवरी 2008 में जब भारत के विशेष दूत ऊर्जा संकट से जूझ रहे देश के लिए यूरेनियम की मांग लेकर पर्थ पहुँचे, तो उन्हें परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर करने की शर्त के साथ वापस भेज दिया गया। पूरे यूपीए शासनकाल में यही स्थिति बनी रही, जबकि ऑस्ट्रेलिया चीन को यूरेनियम बेचने पर चर्चा करता रहा।
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता में आने के करीब 100 दिनों के भीतर सितंबर 2014 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसी सप्ताह मेलबर्न में अंतिम प्रशासनिक बाधा भी दूर हो गई, जिससे भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को पाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
व्यापार के मोर्चे पर भी दोनों देशों के संबंध मजबूत हुए हैं। 2022 के व्यापार समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार में 55% की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा, निवेश संस्था 'ऑस्ट्रेलियन सुपर' ने भारत में 50 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के निवेश की घोषणा की है।
इंडोनेशिया: रक्षा खरीदार से विक्रेता बना भारत
जकार्ता में हुई प्रगति ने रक्षा क्षेत्र में भारत की भूमिका को एक खरीदार से बदलकर एक महत्वपूर्ण विक्रेता के रूप में स्थापित किया है। भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की आपूर्ति के लिए समझौता हुआ। फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया तीसरा देश है, जिसने भारत की रक्षा तकनीक पर भरोसा जताया है। इसके अलावा 'अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली' से जुड़ा करार भी हुआ।
मिसाइल सौदे से भी अधिक रणनीतिक महत्व मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित सबांग बंदरगाह के विकास में सहयोग का है। यह भारत के ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट हब से महज 160 किलोमीटर दूर है, जो विश्व के एक-तिहाई व्यापार वाले समुद्री मार्ग पर भारत की पहुँच बढ़ाएगा। इस यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पीएम मोदी को देश के सर्वोच्च नागरिक और सैन्य सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा' से भी सम्मानित किया।
न्यूजीलैंड: 40 साल बाद नई रणनीतिक साझेदारी
चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी, जिसने कई सालों से अटकी पड़ी व्यापार वार्ताओं को नई गति दी। ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी ने एक नई रणनीतिक साझेदारी और 2030 रोडमैप की घोषणा की। इसमें समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर का व्यापार लक्ष्य शामिल है। सबसे महत्वपूर्ण, भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच हुआ लॉजिस्टिक्स समझौता है, जिसके तहत भारतीय नौसैनिक जहाज अब ऑकलैंड में सहायता और आपूर्ति प्राप्त कर सकेंगे। यह हिंद महासागर से लेकर दक्षिण प्रशांत तक भारत की समुद्री पहुँच के विस्तार का प्रतीक है।
इनपुट: IANS



