जम्मू-कश्मीर: उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर आरोप, 'परिसीमन के ज़रिए पिछले दरवाज़े से शासन की कोशिश'
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अपने वादे तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया का उद्देश्य लोकतांत्रिक प
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अपने वादे तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को मज़बूत करना नहीं, बल्कि 'पिछले दरवाज़े से शासन' करना था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक सभा को संबोधित करते हुए अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि भाजपा देश भर में 'ऑपरेशन लोटस' के माध्यम से विपक्षी दलों को कमज़ोर करने का प्रयास कर रही है।
उमर अब्दुल्ला ने ज़ोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग राज्य का दर्जा बहाल होने का और इंतज़ार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, "राजनीतिक नेताओं, संसद और सुप्रीम कोर्ट के इस आश्वासन के बावजूद कि राज्य का दर्जा जल्द से जल्द बहाल किया जाएगा। केंद्र ने बार-बार अपने वादे तोड़े हैं। लोगों ने केंद्र पर भरोसा किया था, लेकिन उन्हें अधूरे वादे ही मिले।"
राज्य का दर्जा: वादा, एहसान नहीं
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग केंद्र से कोई एहसान नहीं है, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों से किया गया एक वादा है। उन्होंने कहा कि 2024 का चुनाव लड़ने वाले लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस वादे का समर्थन किया था। उन्होंने भाजपा को चुनौती दी कि वे अपने किसी ऐसे उम्मीदवार का नाम बताएं जिसने चुनाव में राज्य का दर्जा बहाली का विरोध किया हो।
परिसीमन और विपक्षी दल
अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को कमज़ोर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और पंजाब में आम आदमी पार्टी का उदाहरण दिया। जम्मू-कश्मीर में 2022 में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हुई थी, जिसके बाद विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो गई थी।
उनकी पार्टी, सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए अपना अभियान तेज़ कर दिया है। पार्टी ने इस मांग के समर्थन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन का भी आह्वान किया है, जो दर्शाता है कि यह मुद्दा आने वाले समय में उनके राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रहेगा।
इनपुट: IANS



