मंगलवार, 21 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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PLI स्कीम की सफलता: ₹2.4 लाख करोड़ का निवेश, 14 लाख नौकरियां और मोबाइल उत्पादन में 2.4 गुना की छलांग

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं के तहत 14 प्रमुख क्षेत्रों में…

PLI स्कीम की सफलता: ₹2.4 लाख करोड़ का निवेश, 14 लाख नौकरियां और मोबाइल उत्पादन में 2.4 गुना की छलांग
(फोटो: IANS)

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, इन योजनाओं के तहत 14 प्रमुख क्षेत्रों में 2.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल से देश में 14.15 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।

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लोकसभा में एक लिखित जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि इन योजनाओं को 1.91 लाख करोड़ रुपये के स्वीकृत वित्तीय परिव्यय के साथ शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है।

विभिन्न क्षेत्रों में निवेश का ब्योरा

आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक निवेश उच्च दक्षता वाले सोलर फोटोवोल्टिक (पीवी) मॉड्यूल क्षेत्र में आया, जिसने अकेले 64,873 करोड़ रुपये आकर्षित किए। इसके बाद फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर ने 45,158 करोड़ रुपये और ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स उद्योग ने 44,326 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया। अन्य प्रमुख क्षेत्रों में स्पेशियलिटी स्टील (₹23,896 करोड़) और बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (₹20,580 करोड़) शामिल हैं।

निर्यात और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग पर असर

सरकार के अनुसार, पीएलआई कार्यक्रम से निर्यात में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है। बीते तीन वर्षों में यह वित्त वर्ष 2023-24 के 4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 तक 15.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। सरकार का कहना है कि यह वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर इस योजना का गहरा असर पड़ा है। पीएलआई कार्यक्रम शुरू होने के बाद से मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग 2.4 गुना बढ़ गया है। आज भारत में बिकने वाले लगभग 99.2% मोबाइल फोन देश में ही बन रहे हैं, जिससे मोबाइल फोन के आयात में करीब 77% की कमी आई है।

योजना की निगरानी

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) इन योजनाओं के समन्वय के लिए नोडल एजेंसी है, जबकि इन्हें लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित मंत्रालयों की है। इन योजनाओं के कार्यान्वयन की समय-समय पर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (EGoS) और संबंधित मंत्रालयों द्वारा समीक्षा की जाती है।

इनपुट: IANS

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