शनिवार, 18 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तानी सेना और ISIS-K के कथित संबंधों पर अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट, दक्षिण एशिया में अस्थिरता का खतरा

अमेरिकी थिंक टैंक 'मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट' (MEMRI) ने अपनी एक रिपोर्ट में पाकिस्तान की सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई इस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी…

पाकिस्तानी सेना और ISIS-K के कथित संबंधों पर अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट, दक्षिण एशिया में अस्थिरता का खतरा
(फोटो: IANS)

अमेरिकी थिंक टैंक 'मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट' (MEMRI) ने अपनी एक रिपोर्ट में पाकिस्तान की सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई इस रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISK-P) को पनाह दे रही है और फिर उसी के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर अफगानिस्तान में हवाई हमले कर रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पाकिस्तान की दोहरी रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद तालिबान सरकार पर दबाव बनाना और पश्चिमी देशों के सामने अपनी एक सख्त छवि पेश करना है।

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रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल का आरोप

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान दशकों से भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ आतंकी गुटों का इस्तेमाल एक रणनीति के तौर पर करता रहा है। उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए MEMRI ने दावा किया है कि पाकिस्तान, ISK-P को वैचारिक समर्थन देने के बजाय एक 'रणनीतिक उपकरण' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य अफगान तालिबान और बलूच विद्रोही समूहों पर दबाव बनाना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जून 2026 को अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर ISK-P के ठिकानों को लेकर ड्रोन गतिविधियों की खबरें आई थीं, और हाल के वर्षों में ऐसी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। यह रिपोर्ट पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था और ISK-P के बीच कथित संबंधों को दक्षिण एशिया में अस्थिरता बढ़ाने वाला बताती है।

तालिबान से बिगड़ते रिश्ते और आंतरिक सुरक्षा

अगस्त 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता वापसी के बाद से पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों में गिरावट आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सीमा पर झड़पें बढ़ी हैं और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। कतर, तुर्की और चीन जैसे देशों की मध्यस्थता की कोशिशें भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में नाकाम रही हैं।

इसके अलावा, बलूच सशस्त्र समूहों ने बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) से जुड़ी परियोजनाओं पर हमले तेज कर दिए हैं। चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा को लेकर बीजिंग ने पाकिस्तान से अपनी चिंता जताई है, जिससे पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर पर दबाव बढ़ा है।

रिपोर्ट की पश्चिमी देशों से अपील

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि पाकिस्तान ने बढ़ते उग्रवाद के जवाब में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में कड़े सुरक्षा उपाय अपनाए हैं, लेकिन इससे स्थानीय समुदायों में असंतोष बढ़ने का खतरा है। MEMRI ने पश्चिमी देशों से अपील की है कि वे पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य और आर्थिक सहायता को ISK-P नेटवर्क के खिलाफ ठोस और स्वतंत्र रूप से निगरानी की जाने वाली कार्रवाई से जोड़ें, ताकि क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक सुरक्षा जोखिमों को नियंत्रित किया जा सके।

इनपुट: IANS

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