शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: महिला हिंसा मामलों में जांच का पूर्वाग्रहपूर्ण होना न्याय की राह में सबसे बड़ा रोड़ा - सुप्रीम कोर्ट

पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने महिला हिंसा से जुड़े मामलों की जांच-प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत के अनुसार, सिर्फ सामाजिक सोच में बदलाव लाना ही काफी नहीं है, बल्कि पुलिस…

पाकिस्तान: महिला हिंसा मामलों में जांच का पूर्वाग्रहपूर्ण होना न्याय की राह में सबसे बड़ा रोड़ा - सुप्रीम कोर्ट
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने महिला हिंसा से जुड़े मामलों की जांच-प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत के अनुसार, सिर्फ सामाजिक सोच में बदलाव लाना ही काफी नहीं है, बल्कि पुलिस जांच को भी लैंगिक पूर्वाग्रहों से मुक्त करना होगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि जब जांच ही भेदभावपूर्ण हो जाती है, तो सच्चाई दब जाती है और न्यायाधीश तक सबूत पहुंचने से पहले ही न्याय की प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

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यह फैसला हत्या के एक मामले पर आया, लेकिन इसके मायने कहीं ज़्यादा गहरे हैं। दो-सदस्यीय पीठ की ओर से फैसला लिखते हुए जस्टिस मोहम्मद हाशिम खान काकर ने कहा, “पुलिस अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े मामलों की जांच करते समय लैंगिक और पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रहों को पहचानने और उनसे ऊपर उठने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।” श्रीलंका के अखबार डेली मिरर की रिपोर्ट के हवाले से अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी मानसिकता निष्पक्ष जांच और न्याय की राह में बड़ी बाधा बन सकती है।

घरेलू हिंसा की छिपी सच्चाई

अदालत ने घरेलू हिंसा के मामलों को आपराधिक न्याय प्रणाली के लिए एक विशेष चुनौती माना, क्योंकि ये अपराध अक्सर बंद दरवाजों के पीछे होते हैं। अदालत ने कहा कि त्रासदी सिर्फ यह नहीं है कि एक महिला की उसके घर में हत्या हो सकती है, बल्कि यह भी है कि उसकी मौत से जुड़े हालात चारदीवारी के भीतर छिपे रह जाते हैं। अदालत ने जोर देकर कहा, “कानूनी व्यवस्था की जिम्मेदारी है कि वह सच को उजागर करे, न कि वैवाहिक घर की निजता को अपराधियों के लिए सुरक्षा कवच बनने दे।”

ऐसे मामलों में स्वतंत्र गवाहों का न होना, सबूतों को छिपाया जाना और परिवार के सदस्यों का गवाही देने से हिचकना आम बात है। यदि पीड़िता की मौत हो जाती है, तो वह अपना पक्ष रखने के लिए भी मौजूद नहीं होती। इन चुनौतियों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को सभी उपलब्ध सबूतों की पहचान करने, उन्हें सुरक्षित रखने और रिकॉर्ड पर लाने पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।

पंजाब में लैंगिक हिंसा के चौंकाने वाले आंकड़े

इस महीने की शुरुआत में एक मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में महिला हिंसा से जुड़े भयावह आंकड़े पेश किए थे। पीस एंड जस्टिस नेटवर्क पाकिस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच प्रांत में महिलाओं और लड़कियों से जुड़े 1,95,787 मामले दर्ज किए गए। यह संख्या देशभर में दर्ज लैंगिक हिंसा के कुल मामलों का लगभग 82 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में इस अवधि के दौरान घरेलू हिंसा के 14,824 मामले सामने आए, जिनमें 3,746 हत्याएं शामिल थीं। इसके अलावा, ऑनर किलिंग के 830 और महिलाओं को जलाने के 442 मामले दर्ज हुए। आंकड़ों में यौन हिंसा के 20,560 मामले भी शामिल हैं, जिनमें 16,827 बलात्कार और 2,183 सामूहिक बलात्कार की घटनाएं थीं। अपहरण के 90,965 मामले सभी श्रेणियों में सबसे अधिक थे।

इनपुट: IANS

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