पाकिस्तान के गृह मंत्री ने अपनी ही सरकार की व्यवस्था को बताया 'विफल', सत्ताधारी गठबंधन में बेचैनी
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की 70 साल पुरानी शासन व्यवस्था को "पूरी तरह विफल" बताकर अपनी ही सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, नकवी की…
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की 70 साल पुरानी शासन व्यवस्था को "पूरी तरह विफल" बताकर अपनी ही सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, नकवी की इस टिप्पणी ने न केवल राजनीतिक बहस छेड़ दी है, बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी दरारों को उजागर कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता प्रतिष्ठान से उनकी निकटता के कारण उनके बयान को महज निजी राय नहीं माना जा सकता।
डॉन अखबार में वरिष्ठ पत्रकार जाहिद हुसैन के एक लेख के हवाले से कहा गया है कि नकवी ने पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट में यह बयान दिया। उन्होंने कहा, "जिस व्यवस्था के तहत हम रह रहे हैं, वह ढह चुकी है। इससे समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।" उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही व्यवस्था जारी रही, तो देश 10 साल बाद भी इन्हीं मुद्दों पर बात कर रहा होगा। नकवी ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद पाकिस्तान को गेहूं आयात करना पड़ रहा है।
गठबंधन में सवाल और नकवी की स्थिति
नकवी के इस बयान से सत्ताधारी गठबंधन में हलचल है। कई केंद्रीय मंत्रियों ने उनके अधिकार और भूमिका पर सवाल उठाए हैं। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने उन्हें एक "पावरहाउस" बताते हुए कहा कि वे किसी के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नकवी न तो किसी राजनीतिक दल के सदस्य हैं और न ही नियमित रूप से कैबिनेट या संसद की बैठकों में शामिल होते हैं, फिर भी क्रिकेट से लेकर सुरक्षा और विदेश नीति तक, कई अहम मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की जनता महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतों और गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। जाहिद हुसैन के लेख के अनुसार, नकवी की यह टिप्पणी 2024 के विवादित आम चुनावों के बाद बने हाइब्रिड राजनीतिक ढांचे की अंदरूनी कमजोरियों को भी सामने लाती है। दिलचस्प बात यह है कि बाद में सेना के एक प्रवक्ता ने भी नकवी के प्रशासनिक सुधारों के सुझाव का समर्थन किया और राजनीतिक दलों से इस पर विचार करने की अपील की।
व्यवस्था में सुधार या ध्यान भटकाने की कोशिश?
नकवी ने अपने भाषण में नए प्रांतों के गठन और व्यापक प्रशासनिक सुधारों की भी वकालत की थी। हालांकि, उनके आलोचक इसे जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने और सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की एक कोशिश के रूप में देख रहे हैं। जाहिद हुसैन ने अपने लेख में यह भी लिखा कि नकवी ने व्यवस्था की विफलता की बात तो की, लेकिन यह नहीं बताया कि पाकिस्तान के इतिहास में अधिकांश समय सुरक्षा प्रतिष्ठान का कितना प्रभाव रहा है। उन्होंने गृह मंत्री को सलाह दी कि उन्हें नई प्रशासनिक इकाइयों के बजाय खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और पीओके में बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
इनपुट: IANS



