शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान: पंजाब में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर के ढहने पर विवाद, अल्पसंख्यक समुदाय में चिंता

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल में एक सदी से भी ज़्यादा पुराने हिंदू मंदिर के ढह जाने से अल्पसंख्यक समुदायों में चिंता और आक्रोश है। इस घटना पर विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि इसके ढहने के कारणों…

पाकिस्तान: पंजाब में 100 साल पुराने हिंदू मंदिर के ढहने पर विवाद, अल्पसंख्यक समुदाय में चिंता
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल में एक सदी से भी ज़्यादा पुराने हिंदू मंदिर के ढह जाने से अल्पसंख्यक समुदायों में चिंता और आक्रोश है। इस घटना पर विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि इसके ढहने के कारणों को लेकर सरकारी विभाग और अल्पसंख्यक अधिकार समूह अलग-अलग दावे कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक पक्ष इसे भारी बारिश का नतीजा बता रहा है, जबकि दूसरा इसे जानबूझकर की गई तोड़फोड़ कह रहा है।

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पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (पीएमएमपी) ने आरोप लगाया है कि मंदिर को साजिशन गिराया गया ताकि पास के एक मदरसे के लिए जगह बनाई जा सके। संगठन के अध्यक्ष असलम परवेज साहोत्रा ने कहा कि अगर मंदिर सिर्फ बारिश से ढहा होता, तो उसकी ईंटें और लोहा जैसी निर्माण सामग्री गायब नहीं होती। उन्होंने कहा कि मंदिर को धीरे-धीरे तोड़ा जा रहा था।

प्रशासन और अल्पसंख्यक संगठन के परस्पर विरोधी दावे

इस मामले में पाकिस्तान का इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी), जो विभाजन के बाद भारत गए हिंदुओं और सिखों की संपत्तियों का प्रबंधन करता है, का कहना है कि मंदिर भारी बारिश के कारण ढहा। पंजाब सरकार ने भी ईटीपीबी के इस दावे का समर्थन किया है। इसके विपरीत, पीएमएमपी अध्यक्ष साहोत्रा ने बताया कि उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव को लिखित शिकायत दी है। अपनी शिकायत में उन्होंने मंदिर गिराने के लिए जिम्मेदार लोगों और सुरक्षा में विफल अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

साहोत्रा ने यह भी बताया कि इसी साल जनवरी में सियालकोट स्थित ईटीपीबी के उप निदेशक ने मदरसे का पट्टा रद्द करने और अवैध कब्जा हटाने का आदेश दिया था, लेकिन इसे कभी लागू नहीं किया गया। पीएमएमपी ने मंदिर को उसके मूल स्वरूप में दोबारा बनाने और सरकार से सभी अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की उन पुरानी चिंताओं को फिर से सतह पर ला दिया है, जहां उनके धार्मिक और विरासत स्थलों को अक्सर विवादित परिस्थितियों में नुकसान पहुंचाया जाता रहा है। इसी साल जून में फारूकाबाद स्थित 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब के कुछ हिस्सों को भी कथित तौर पर एक स्थानीय कारोबारी ने बिना कानूनी अनुमति के ध्वस्त कर दिया था। सिख समुदाय के विरोध प्रदर्शन के बाद ही प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया था।

इनपुट: IANS

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