शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

‘स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियाँ खाईं, आपको अंडों से डर लगता है?’, महुआ मोइत्रा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कथित तौर पर हिंसा भड़काने वाले बयानों के एक मामले में जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत पेशी से छूट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग…

‘स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियाँ खाईं, आपको अंडों से डर लगता है?’, महुआ मोइत्रा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
(फोटो: IANS)

तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। कथित तौर पर हिंसा भड़काने वाले बयानों के एक मामले में जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत पेशी से छूट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की उनकी याचिका को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मोइत्रा की दलीलों पर असंतोष जताते हुए तीखी मौखिक टिप्पणियाँ कीं।

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शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मोइत्रा की मांग पर सवाल उठाए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जब मोइत्रा के वकील ने भीड़ के हमले की आशंका जताते हुए एक पुरानी घटना का जिक्र किया जिसमें उन पर अंडे फेंके गए थे, तो पीठ ने कहा, "आप सांसद हैं? राजनीति में आने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खाई थीं।"

जांच में सहयोग का निर्देश

महुआ मोइत्रा के वकील, वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने पीठ को बताया कि उनकी मुवक्किल जांच में शामिल होना चाहती हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विकल्प चाहती हैं। इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने पूछा, "वर्चुअली क्यों? सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं?" अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि मोइत्रा को जांच में व्यक्तिगत रूप से सहयोग करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट की इन सख्त टिप्पणियों के बाद मोइत्रा के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए याचिका को 'वापस लिया हुआ मानकर खारिज' कर दिया।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला महुआ मोइत्रा द्वारा दिए गए कुछ सार्वजनिक बयानों से जुड़ा है, जिन पर हिंसा भड़काने का आरोप है। इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में 5 अक्टूबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी। हालांकि, यह राहत इस शर्त पर दी गई थी कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगी। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में बताया था कि मोइत्रा को पूछताछ के लिए चार बार नोटिस भेजा गया, लेकिन वह संसदीय व्यस्तताओं का हवाला देकर पेश नहीं हुईं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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