शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप, 23 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से किया हस्तक्षेप का अनुरोध

देश के 23 प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गा

चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर का आरोप, 23 विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से किया हस्तक्षेप का अनुरोध
(फोटो: IANS)

देश के 23 प्रमुख विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी समेत इन दलों के नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक संयुक्त पत्र लिखकर चुनाव आयोग की मतदाता सत्यापन प्रक्रिया (SIR) पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

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28 जून को लिखे इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मूल अवधारणा से समझौता किया जा रहा है, जिससे हाल के चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। नेताओं का कहना है कि यह एक "असाधारण कदम" है, क्योंकि गणतंत्र के मूल स्तंभ गंभीर दबाव में हैं।

मतदाता सूची से नाम हटाने पर आपत्ति

विपक्षी दलों की सबसे बड़ी चिंता चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया को लेकर है। पत्र में इसे "स्वभाव से ही बहिष्करणकारी और राजनीतिक रूप से प्रेरित" बताते हुए दावा किया गया है कि इसके कारण लाखों वास्तविक मतदाता, विशेषकर गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों के लोग, अपने मताधिकार से वंचित हो गए।

उदाहरण के तौर पर, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए कहा गया कि 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' श्रेणी के तहत 27 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे। इस दावे के समर्थन में एक न्यायिक ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों का भी उल्लेख किया गया, जिसके अनुसार जांचे गए मामलों में से लगभग 96 प्रतिशत नाम गलत तरीके से हटाए गए थे।

EVM और जांच एजेंसियों पर भी चिंता

मतदाता सूची के अलावा, पत्र में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर भी चिंता जताई गई है। विपक्षी नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास पूरी तरह से बहाल करने के लिए बैलट पेपर प्रणाली पर फिर से व्यापक सार्वजनिक बहस की मांग की है।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल व्यवस्थित रूप से विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और चुनावी माहौल को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।

न्यायपालिका से अंतिम उम्मीद

नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट को संविधान का "अंतिम संरक्षक" बताते हुए कहा कि जब अन्य संस्थाएं विफल हो जाती हैं, तो न्यायपालिका ही लोगों की अंतिम उम्मीद होती है। पत्र का समापन इस अपील के साथ होता है कि "जब संस्थाएं स्वयं दमन का साधन बन जाएं... तब हमारे लोकतंत्र का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ जाता है।"

हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख नेता: इस पत्र पर मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस), अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), तेजस्वी यादव (राजद), फारूक अब्दुल्ला (नेशनल कॉन्फ्रेंस), सुप्रिया सुले (एनसीपी-शरदचंद्र पवार), डी. राजा (सीपीआई), महबूबा मुफ्ती (पीडीपी) और संजय सिंह (आप) समेत 23 दलों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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