ओडिशा बाढ़ की चपेट में: 18 ज़िलों में 6 लाख लोग प्रभावित, महानदी में उफान से बढ़ी चिंता
ओडिशा में बाढ़ का संकट बना हुआ है, जिससे राज्य के 18 जिलों में लगभग 6 लाख लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश और नदियों के उफान के चलते जल-जमाव…
ओडिशा में बाढ़ का संकट बना हुआ है, जिससे राज्य के 18 जिलों में लगभग 6 लाख लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भारी बारिश और नदियों के उफान के चलते जल-जमाव, सड़क संपर्क टूटना, फसलों का नुकसान और बिजली कटौती जैसी समस्याओं ने लाखों लोगों को प्रभावित किया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 95 ब्लॉक, 472 ग्राम पंचायतें और 1,301 गांव इस आपदा की चपेट में हैं, जबकि 14 शहरी निकाय भी प्रभावित हुए हैं।
अब तक कुल 5,93,083 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं और इनमें से 1,76,518 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। गुरुवार को राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य भर में बारिश लगभग थम गई है और 1 अगस्त तक बारिश की कोई चेतावनी नहीं है, जिससे बाढ़ की स्थिति में जल्द सुधार की उम्मीद है।
महानदी में मध्यम स्तर की बाढ़ की चेतावनी
गुरुवार को जल संसाधन विभाग ने महानदी नदी में मध्यम स्तर की बाढ़ की चेतावनी जारी की। विभाग ने खुर्दा, पुरी, जगतसिंहपुर और केंद्रपाड़ा जिलों के प्रशासन को अगले 24 घंटे सतर्क रहने के लिए कहा है। विभाग के मुख्य अभियंता के अनुसार, गुरुवार शाम तक मुंडली बैराज पर करीब नौ लाख क्यूसेक पानी के बहाव का अनुमान था। स्थिति से निपटने के लिए इन जिलों के निचले इलाकों में अनुभवी अधिकारियों और इंजीनियरों की तैनाती कर दी गई है।
मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया, "नदी के किनारे बसे निचले इलाकों पर असर पड़ना शुरू हो गया है। कटक जिले के बदांबा और अथागढ़ के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है।" उन्होंने कहा कि कटक के जिला कलेक्टर को स्थिति बिगड़ने से पहले लोगों तक मदद पहुंचाने और उन्हें समय पर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत और बचाव कार्य
गुरुवार को मंत्री सुरेश पुजारी ने हेलीकॉप्टर के जरिए जाजपुर, भद्रक, बालेश्वर और केंदुझार जिलों में बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उनके साथ राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरबिंद कुमार पाधी और विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल भी मौजूद थे। मंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों, खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं से अपील की है कि वे राहत शिविरों में चले जाएं, भले ही आने वाले घंटों में जलस्तर घटने की संभावना हो।
राहत की बात यह है कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के ऊपरी इलाकों में बारिश कम होने से महानदी में जलस्तर घटने की उम्मीद है। इसके अलावा, देवी, कुशाभद्रा, इब, ब्राह्मणी, बैतरणी, सुवर्णरेखा और ऋषिकुल्या समेत अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर भी धीरे-धीरे कम हो रहा है।
इनपुट: IANS



